पैराडाइज पेपर्स में 714 कंपनियों और भारतीय लोगों के नाम का खुलासा होने के बाद केन्द्र सरकार हरकत में आ गई है। सीबीडीटी (सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस) इस मामले की पड़ताल करेगी। सीबीडीटी चेयरमैन की निगरानी में केन्द्र सरकार ने एक मल्टी एजेंसी का गठन किया है। इसमें सीबीआई, ईडी, आरबीआई, एफआईयू शामिल होगी। इसके अलावा सेक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया ने भी पैराडाइज पेपर्स लीक की जांच का मन बनाया है।
सेबी की जांच बढ़ाएगी मुश्किल
सेबी द्वारा की जा रही जांच पैराडाइज पेपर्स लीक मामले में आने वाली कंपनियों की मुसीबत बढ़ा सकती है। दरअसल, पैराडाइज पेपर्स के दस्तावेज इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इंवेस्टीगेटिव जर्नलिस्ट(आईसीआईजे) ने जारी किए हैं। आईसीआईजे ने 1.34 करोड़ दस्तावेजों की पड़ताल की है और इनमें से उन अमीर लोगों और कंपनियों के नाम को सार्वजनिक किया है, जिन्होंने गुप्त धन (काला धन) का निवेश किया है। इसमें कई भारतीय कंपनियां हैं और कई नामचीन भारतीय लोगों का नाम शामिल है।
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केन्द्रीय मंत्री जयंत सिन्हा, राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा, फिल्म अभिनेता अभिताभ बच्चन आदि के नाम प्रमुख हैं। हालांकि इस बारे में जयंत सिन्हा ने अपनी सफाई दे दी है। आरके सिन्हा ने अपना नाम आने के बाद मौनव्रत धारण कर लिया है। जबकि अमिताभ बच्चन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
पनामा पेपर्स
जर्मनी के ही एक अखबार जीटॉयचे साइटुंग ने पनामा पेपर्स के दस्तावेज भी सार्वजनिक किए थे। इसमें कई भारतीयों के नाम थे। करीब 18 महीने पहले सार्वजनिक हुए लोगों के नाम को लेकर भारत सरकार ने अभी तक कोई जांच प्रक्रिया पूरी नहीं की है। इसमें कांग्रेस और भाजपा के भी कई प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आए थे।