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Caste Politics: जातिगत रंग में डूबा कर्नाटक चुनाव; किन बयानों पर मचा बवाल और किसके पक्ष में लग रहे समीकरण?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Sun, 23 Apr 2023 05:48 PM IST

सार

इस हफ्ते कोलार, भालकी और हुमनाबाद में अपने भाषणों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जातिगत जनगणना की मांग की। कोलार में राहुल ने मोदी सरकार पर 2011 के सामाजिक आर्थिक और जाति जनगणना के आंकड़ों को छिपाने का आरोप लगाया।
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कर्नाटक विधानसभा चुनाव - फोटो : AMAR UJALA
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में अब तीन हफ्तों से भी कम का समय बचा है। इसको देखते हुए राजनीतिक दलों ने अपना चुनाव प्रचार भी तेज कर दिया है। इस बीच कई नेताओं के जातिगत बयानों ने राज्य की सियासत को गरम कर दिया है। एक ओर जहां पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जातिगत जनगणना की मांग की है तो पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने लिंगायतों को लेकर ऐसा कुछ कहा है, जिस पर विवाद खड़ा हो गया है।
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कर्नाटक विधानसभा चुनाव - फोटो : AMAR UJALA
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में अब तीन हफ्तों से भी कम का समय बचा है। इसको देखते हुए राजनीतिक दलों ने अपना चुनाव प्रचार भी तेज कर दिया है। इस बीच कई नेताओं के जातिगत बयानों ने राज्य की सियासत को गरम कर दिया है। एक ओर जहां पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जातिगत जनगणना की मांग की है तो पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने लिंगायतों को लेकर ऐसा कुछ कहा है, जिस पर विवाद खड़ा हो गया है।

राहुल गांधी - फोटो : ANI
कर्नाटक चुनाव के बीच जातिगत बयानबाजी क्यों चर्चा में है?
इस हफ्ते कोलार, भालकी और हुमनाबाद में अपने भाषणों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जातिगत जनगणना की मांग की। कोलार में राहुल ने मोदी सरकार पर 2011 के सामाजिक आर्थिक और जाति जनगणना के आंकड़ों को छिपाने का आरोप लगाया। बीते रविवार को यहां उन्होंने मांग की थी कि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए कोटा उनकी जनसंख्या के अनुपात में होना चाहिए। साथ ही उन्होंने आरक्षण पर 50 फीसदी वाली कैप हटाने की भी मांग कर डाली। उन्होंने यह भी कहा कि सचिव रैंक के केवल सात प्रतिशत सिविल सेवक ओबीसी, एससी या एसटी समुदायों के हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर - फोटो : सोशल मीडिया
जब सरकार में थे तब ओबीसी के लिए कुछ नहीं किया: भाजपा
कर्नाटक में कांग्रेस पर पिछड़ों की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए भाजपा ने इसे पाखंड करार दिया। भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि जब वे सरकार में थे, तब उन्होंने ओबीसी के लिए कुछ नहीं किया। प्रधानमंत्री और कर्नाटक में डबल इंजन सरकार के तहत समुदाय के लिए किए गए सभी कार्यों को देखें। वादे करना और गायब होना कांग्रेस की शैली है।

कांग्रेस नेता सिद्धारमैया - फोटो : SOCIAL MEDIA
सिद्धारमैया ने क्या कहा जिस पर हो रहा बवाल?
इस हफ्ते दिग्गज कांग्रेस नेता पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी एक ऐसा बयान दिया, जिससे कर्नाटक की राजनीति में भूचाल आ गया। दरअसल सिद्धारमैया ने लिंगायतों को लेकर ऐसा कुछ कहा है, जिस पर विवाद हो गया है। भाजपा ने इसे पूरे लिंगायत समुदाय से जोड़ दिया है और इसे पूरे समुदाय का अपमान बताया है। दरअसल, एक निजी टीवी चैनल के पत्रकार ने सिद्धारमैया से पूछा था कि क्या लिंगायत समुदाय के नेता को मुख्यमंत्री बनना चाहिए। इस पर सिद्धारमैया ने कहा कि पहले से ही लिंगायत मुख्यमंत्री है, लेकिन वह सारे भ्रष्टाचार की जड़ हैं।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई - फोटो : एएनआई
भाजपा ने पूरे लिंगायत समुदाय का अपमान बताया
सिद्धारमैया के इस बयान पर कर्नाटक भाजपा ने उन्हें घेर लिया। भाजपा ने एक ट्वीट में लिखा कि यह अक्षम्य है कि एक व्यक्ति जो समुदाय को बांटने की कोशिश कर रहा है, अब वह कह रहा है कि समुदाय भ्रष्ट है! इस बीच रविवार को राज्य के मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बसवराज बोम्मई ने कहा कि एक पूर्व सीएम का इस तरह का बयान देना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा है कि पूरा लिंगायत समुदाय भ्रष्ट है, अतीत में ब्राह्मण समुदाय का मजाक उड़ाया गया था। इससे पहले जब वे मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने लिंगायत-वीरशैव समुदाय को तोड़ने की कोशिश की थी। सीएम ने अंत में कहा कि राज्य के लोग सिद्धारमैया को सबक सिखाएंगे।

सिद्धारमैया को देनी पड़ी सफाई
बयान पर विवाद होने पर सिद्धारमैया ने अपने बयान पर सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई को भ्रष्ट बता रहे थे, जो भ्रष्टाचार में विश्वास रखते हैं। मेरे मन में वीरशैव लिंगायत के लिए बहुत सम्मान है और हमने लिंगायतों को 50 से ज्यादा टिकट दिए हैं। पूर्व सीएम ने कहा कि भाजपा  उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है और इससे विवाद पैदा करना चाहती है।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला
कर्नाटक का जातीय समीकरण क्या है?
राज्य में दलितों की आबादी 19.5 फीसदी है। ये वोट आम तौर पर सभी दलों में विभाजित होते हैं, हालांकि कांग्रेस इन वोटों का एक बड़ा हिस्सा हासिल करने में कामयाब होती है। दूसरी ओर मुसलमानों की आबादी 16 प्रतिशत है। ये वोट आमतौर पर कांग्रेस और जेडीएस के बीच बंटते हैं। लिंगायतों की जनसंख्या का 14 प्रतिशत हिस्सा है और यह समुदाय कई वर्षों से भाजपा को वोट देता रहा है। 14 फीसदी वोक्कालिगा वोट शेयर आमतौर पर कांग्रेस और जेडीएस के बीच विभाजित होता है। अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कर्नाटक की आबादी का 20 प्रतिशत हैं और इसमें से सात प्रतिशत अकेले कुरुबा हैं।

अबकी बार किस पार्टी की नजर किस वोटबैंक पर?
कर्नाटक में जाति की राजनीति राज्यों की तरह ही है और हर पार्टी जाति के गणित को ठीक करने की कोशिश करती है। यहां लिंगायत ववोक्कालिगा दो प्रमुख जातियां हैं, जिन्हे इस बार भी बीजेपी और कांग्रेस दोनों अपनी ओर साधने में लगे हैं हैं। भाजपा को लिंगायतों का पसंदीदा माना जाता है जो इस बार वोक्कालिगा वोट हासिल करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। अभी तक 15 फीसदी समाज का अधिकतर वोट जेडीएस के पक्ष में और कुछ तबकों में कांग्रेस की पैठ है।

Karnataka Assembly Election - फोटो : PTI
क्या टिकट बंटवारे में भी दिखा जातिगत प्रभाव?
इस चुनाव में भाजपा ने 2018 में 34 की तुलना में 47 वोक्कालिगा को टिकट दिया है। उधर कांग्रेस समुदाय के वोटों के लिए वोक्कालिगा से आने वाले प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार पर भरोसा कर रही है। उसने 43 वोक्कालिगा को भी टिकट दिया है, जो 2018 के मुकाबले दो ज्यादा है। वोक्कालिगा पार्टी मानी जाने वाली जेडीएस ने 45 वोक्कालिगा को टिकट दिया है। पिछले चुनाव में जेडीएस के पास 24 वोक्कालिगा विधायक थे।

2018 में भाजपा ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस को लिंगायत विरोधी पार्टी के रूप में दिखाने की कोशिश की। हालांकि, इस बार के चुनाव में, कई लिंगायत नेताओं के भाजपा छोड़ने के बाद, कांग्रेस कुछ लिंगायत वोट खिसकने की उम्मीद कर रही है। लिंगायत पिछले कई वर्षों से बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा के कारण पार्टी के के प्रबल समर्थक रहे हैं। येदियुरप्पा अभी भी लिंगायत वोटों को बरकरार रखने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। बीजेपी ने 2018 की तुलना में 68 लिंगायत उम्मीदवारों को टिकट दिया है। कांग्रेस ने 2018 में लिंगायत उम्मीदवारों की संख्या 43 से बढ़ाकर इस चुनाव में 51 कर दी है।

लिंगायत और वोक्कालिगा के अलावा, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदाय के वोटों का 24 फीसदी हिस्सा है और तीनों प्रमुख दल इस हिस्से से अपनी ओर लाना चाहते हैं। कांग्रेस के अहिंदा-अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित वोट बैंक का एक धड़े पर भी बीजेपी की नजर है।
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