केंद्र सरकार ने बुधवार (30 अप्रैल 2025) को जनगणना कराने से जुड़ा बड़ा एलान किया है। केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट की बैठक में लिए गए फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि मोदी सरकार अगली जनगणना के साथ जातीय आधार पर लोगों की गणना भी करेगी। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने विपक्षी दलों को घेरा और कहा कि कांग्रेस ने सिर्फ राजनीति के लिए जातीय मुद्दों को उठाया है। उन्होंने दावा किया कि जातीय जनगणना से सामाजिक ढांचे को कोई नुकसान नहीं होगा।
गौरतलब है कि इससे पहले भी कई मौकों पर जातिगत जनगणना की मांग उठती रही है। लेकिन सरकार ने इन मांगों को दरकिनार कर दिया। हालांकि, अब बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र ने जातीय सर्वे कराने का फैसला किया है। इसी के साथ आजाद भारत में पहली बार जातिगत जनगणना का रास्ता लगभग साफ हो गया है।
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क्या भारत में कहीं जातिगत जनगणना हुई है?
भारत में अब तक दो राज्यों- बिहार और कर्नाटक में जातीय सर्वे हुआ है। दरअसल, राज्य सरकारें जनगणना नहीं करा सकती हैं। यह काम केवल केंद्र सरकार करती है। इसलिए राज्य सरकार इसे सर्वे का नाम देती हैं।
यानी वृहद स्तर पर इन राज्यों में भी जातिगत जनगणना अब तक नहीं की गई है। इसके अलावा तेलंगाना में रेवंत रेड्डी ने भी जातिगत सर्वेक्षण कराया। इसके आंकड़े भी प्रकाशित किए गए। इसमें पिछड़े वर्ग की आबादी सबसे ज्यादा निकल कर आई थी।
कर्नाटक में जातीय सर्वेक्षण का क्या हुआ?
2014 में उस वक्त की सिद्धारमैया सरकार ने जातीय सर्वे किया था। इसका नाम सामाजिक एवं आर्थिक सर्वे दिया गया था। 2017 में इसकी रिपोर्ट आई, लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया गया। दरअसल, अपने समुदाय को OBC या SC/ST में शामिल कराने के लिए जोर दे रहे लोगों के लिए यह सर्वे बड़ा मौका बन गया। अधिकतर ने उपजाति का नाम जाति के कॉलम में दर्ज कराया। इसके चलते कर्नाटक में अचानक 192 से अधिक नई जातियां सामने आ गईं। लगभग 80 नई जातियां तो ऐसी थीं, जिनकी जनसंख्या 10 से भी कम थी। एक तरफ OBC की संख्या में भारी वृद्धि हो गई, तो दूसरी तरफ लिंगायत और वोक्कालिगा जैसे प्रमुख समुदाय के लोगों की संख्या घट गई। इसके बाद इस जातीय सर्वे को सार्वजनिक नहीं किया गया।
बिहार में रिपोर्ट में क्या आया था?
दूसरी तरफ अक्तूबर 2023 में जारी हुए बिहार के जातीय सर्वे में सामने आया था कि राज्य में सबसे ज्यादा पिछड़ा वर्ग की आबादी है। राज्य कुल 63 फीसदी आबादी इस वर्ग से आती है। इनमें 27 फीसदी आबादी पिछड़ा वर्ग के लोगों की है। वहीं, 36 फीसदी से ज्यादा अति पिछड़ी जातियों की आबादी है। वहीं, अनुसूचित जाति की आबादी करीब 20 फीसदी है। जो 2011 की जनगणना में महज 15.9 फीसदी थी। वहीं, सामान्य वर्ग के लोगों की आबादी 15 फीसदी है।
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