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Caste Census: 'जातिगत जनगणना के फैसले ने असली इरादों और खोखली नारेबाजी का अंतर उजागर किया', प्रधान की दो टूक

Thu, 01 May 2025 12:05 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जातिगत जनगणना को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने जातिगत जनगणना कराने का एलान कर दिया है। यह जनगणना मूल जनगणना के साथ ही कराई जाएगी। कैबिनेट की बैठक के बाद मंत्रिमंडल के फैसलों पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, 'राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने आज फैसला किया है कि जाति गणना को आगामी जनगणना में शामिल किया जाना चाहिए।'
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धर्मेंद्र प्रधान - फोटो : PTI
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विस्तार
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केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार को कहा कि अगली जनगणना में जाति गणना को शामिल करने के सरकार के फैसले ने सच्ची मंशा और खोखली नारेबाजी के बीच का अंतर उजागर कर दिया है। भाजपा मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रधान ने इस कदम को निर्णायक फैसला करार दिया। उन्होंने कहा, 'गेमचेंजर फैसले ने हमारे असली इरादों और विपक्ष की खोखली नारेबाजी के बीच का अंतर उजागर कर दिया है।' 

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श्रेय लेने की होड़
हालांकि, इसका अधिकांश विपक्षी दलों ने स्वागत भी किया है। इस बीच इसका श्रेय लेने की होड़ भी दिखाई दे रही है। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल इसका श्रेय खुद ले रहे हैं, जबकि सरकार इसे अपनी उपलब्धि बता रही है।

बीते दिन सरकार ने किया था एलान
इससे पहले एक बड़े फैसले में सरकार ने बुधवार को घोषणा की कि आगामी जनगणना में जाति गणना को पारदर्शी तरीके से शामिल किया जाएगा। घोषणा करते हुए सरकार ने विपक्षी दलों पर जाति सर्वेक्षणों को राजनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल करने के लिए निशाना साधा। कांग्रेस सहित विपक्षी दल देशव्यापी जाति जनगणना की मांग कर रहे हैं और इसे एक बड़ा चुनावी मुद्दा बना रहे हैं। बिहार, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे कुछ राज्य पहले ही ऐसे सर्वेक्षण कर चुके हैं।
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यह भी पढ़ें-  Caste Census: जाति जनगणना कराएगी मोदी सरकार, मूल जनगणना के साथ ही कराई जाएगी; कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला

प्रत्येक 10 साल के अंतराल पर होती है जनगणना
जनगणना 1951 से प्रत्येक 10 साल के अंतराल पर की जाती थी, लेकिन 2021 में कोरोना महामारी के कारण जनगणना टल गई थी। राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को भी अपडेट करने का काम बाकी है। अभी तक जनगणना की नई तारीख का आधिकारिक तौर पर एलान भी नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, जनगणना के आंकड़े 2026 में जारी किए जाएंगे। इससे भविष्य में जनगणना का चक्र बदल जाएगा। जैसे 2025-2035 और फिर 2035 से 2045। 

क्यों अहम है जनगणना?
जनगणना के आंकड़े सरकार के लिए नीति बनाने और उन पर अमल करने के साथ-साथ देश के संसाधनों का समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए बेहद अहम होते हैं। इससे न सिर्फ जनसंख्या बल्कि जनसांख्यिकी, आर्थिक स्थिति कई अहम पहलुओं का पता चलता है। विपक्षी कांग्रेस समेत तमाम सियासी पार्टियां जाति जनगणना की मांग कर रहे हैं, ताकि देश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की कुल संख्या का पता चल सके। 
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पहली जनगणना 1872 और आखिरी 2011 में हुई थी
भारत में हर दस साल में जनगणना होती है। पहली जनगणना 1872 में हुई थी। 1947 में आजादी मिलने के बाद पहली जनगणना 1951 में हुई थी और आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी। आंकड़ों के मुताबिक, 2011 में भारत की कुल जनसंख्या 121 करोड़ थी, जबकि लिंगानुपात 940 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष और साक्षरता दर 74.04 फीसदी था।

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