नोटबंदी के संकट में शहर में दर्जनों शादियां टाल दी गईं, लेकिन शनिवार को रेलवे कर्मचारी की बेटी की शादी लोगों के सामने मिसाल बन गई। यह जिले में पहली ऐसी शादी रही, जिसमें शगुन में चेक दिए गए। नगदी की जगह पूरी शादी कैशलेस हुई। बैंडबाजा, बरात हो या कैटरिंग या फिर कन्यादान का शगुन, सभी भुगतान चेक से हुए।
मुरली विहार निवासी रेलवे कर्मचारी गोपाल सिंह फौजदार की बेटी महिमा की शादी शनिवार को अवधपुरी के एसडी रिसोर्ट से हुई। यह पूरी शादी कैशलेस हुई। आठ नवंबर को नोटबंदी के फैसले के बाद अन्य परिवारों की तरह उनके सामने भी शादी की व्यवस्थाएं करने में मुश्किल खड़ी हो गई, लेकिन वर विवेक के पिता डा. रामवीर सिंह के साथ उन्होंने चर्चा कर कैशलेस पर सहमति बनाई।
सीकरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात डा. रामवीर सिंह ने भी शादी की सभी रस्मों में नगदी की जगह चेक दिए तो वहीं गोपाल सिंह फौजदार ने भी कन्यादान तक का शगुन चेक से किया। बरात के स्वागत के दौरान नाई को शगुन का चेक दिया गया तो उसने मना कर दिया, लेकिन नोटबंदी के बाद बदले हालातों में बुजुर्गों के समझाने पर वह भी प्रधानमंत्री की मुहिम से जुड़ गया। शादी में हर कोई कैशलेस व्यवस्थाएं करने और चेक से पेमेंट की चर्चाएं करता दिखा।
शादी में नगद की जगह हमने चेक और ई-ट्रांजेक्शन ही किए। ज्यादातर रिश्तेदारों ने गिफ्ट और शगुन चेक के जरिए दिए हैं। लोगों ने भी हमें कैशलेस शादी करने में सहयोग दिया।
प्रधानमंत्री के निर्णय के बाद ही हमने बच्चों की शादी कैशलेस करने का निर्णय ले लिया था। कुछ दिक्कतें आईं, लेकिन इरादा मजबूत हो तो रास्ता भी बना और दिक्कतें भी दूर हुईं। लोग भी समझने, मानने लगे।