अपने सहयोगियों के जिए सीपीआर को धन प्रदान कर रहा ऑक्सफैम: प्राथमिकी
इसमें आरोप लगाया गया है कि सीबीडीटी द्वारा आईटी सर्वेक्षण के दौरान पाए गए ईमेल से ऐसा प्रतीत होता है कि ऑक्सफैम इंडिया कमीशन के रूप में अपने सहयोगियों/कर्मचारियों के माध्यम से सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (सीपीआर) को धन प्रदान कर रहा है। यह ऑक्सफैम इंडिया के टीडीएस डेटा से भी परिलक्षित होता है, जो वित्त वर्ष 2019-20 में सीपीआर को 12.71 लाख रुपये का भुगतान दिखाता है।
'घोषित उद्देश्यों के अनुरूप नहीं सीपीआर को किया गया भुगतान'
इसमें कहा गया है कि संगठन ने सामाजिक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए एफसीआरए पंजीकरण कराया था, लेकिन अपने सहयोगियों या कर्मचारियों के जरिए कमीशन के रूप में सीपीआर को किया गया भुगतान ( पेशेवर या तकनीकी सेवाओं) इसके घोषित उद्देश्यों के अनुरूप नहीं है। इसमें आरोप लगाया गया है, यह एफसीआरए 2010 की धारा 8 और 12 (4) का उल्लंघन है।
इस महीने की शुरुआत में एक बयान में ऑक्सफैम इंडिया ने कहा कि यह पूरी तरह से भारतीय कानूनों का पालन करता है। ऑक्सफैम इंडिया का एफसीआरए पंजीकरण दिसंबर 2021 में नवीनीकृत नहीं किया गया था। समूह ने अपने एफसीआरए पंजीकरण का नवीनीकरण नहीं करने के फैसले के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।
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