जल्द ही बसें, कारें और ऑटो सीएनजी की बजाय बॉयो गैस से चलते दिखाई देंगे। सरकार ने इसके लिए देश में बायो गैस के 5 हजार प्लांट लगाने की योजना बनाई है। सरकार की योजना है कि देश में बायोमॉस की बहुलता है और आने वाले वक्त में ऑटोमोटिव, औद्योगिक और वाणिज्यिक उपयोगों में सीएनजी की बजाय कम्प्रैस्ड बायो गैस यानी सीबीजी का इस्तेमाल बढ़ाया जाए।
5 हजार प्लांट्स लगेंगे
परिवहन के सस्ते विकल्प यानी सतत के उद्घाटन समारोह में पहुंचे केंद्रीय पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस के राज्य मंत्री (स्वतन्त्र प्रभार) धर्मेन्द्र प्रधान ने बताया कि कृषि अवशेष, मवेशी गोबर और गन्ना अवशेष और नगर पालिका ठोस अपशिष्टों से बायो गैस को एकत्र किया जाएगा। इसके लिए देशभर में अगले 5 सालों में 1.75 करोड़ की लागत से 5 हजार प्लांट्स लगाए जाएंगे। प्रधान का कहना है कि कम्प्रैस्ड बायो गैस (सीबीजी) में मीथेन की उच्च मात्रा होती है, जिससे वाहन चलाए जा सकते हैं।
46 रुपए प्रति किग्रा की दर से खरीदेंगी कंपनियां
केन्द्रीय मंत्री के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सपना है कि 2022 तक किसानों की आय को दोगुना किया जाए, जिससे गांवों में रोजगार के मौके बढ़ेंगे और व्यवसाय बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि कम्प्रैस्ड बायो गैस के जरिए आने वाले समय में देश की कच्चे तेल से निर्भरता कम होगी। प्रधान ने ऐलान किया कि तेल बेचने वाली कंपनियां और राज्य सरकार के अधीन आने वाली फ्यूल मार्केटिंग कंपनियां इन प्लांट्स से बायोगैस खरीदेंगी। उन्होंने बताया कि सरकार ने इसकी खरीद दर 46 रुपए प्रति किलोग्राम तय की है।
बायो मॉस की बहुलता
प्रधान ने बताया कि देश में बायो मॉस की बहुलता है जिससे भविष्य में बायो गैस बना कर सीएनजी की जगह इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इसके लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल मार्केटिंग कंपनियों इंडियन ऑयल, बीपीसी और एचपीसी के साथ समझौता किया गया है। साथ ही, कम्प्रैस्ड बायो गैस उत्पादन संयंत्र स्थापित करने और ऑटोमेटिव ईंधन में इस्तेमाल करने के लिए संभावित उद्यमियों को आमंत्रित किया जा रहा है।
देश में 32 लाख सीएनजी वाहन
प्रधान के मुताबिक देश में इन दिनों 32 लाख सीएनजी वाहन हैं और पूरे देश में 1500 मजबूत सीएनजी स्टेशंस का नेटवर्क है, जिसे अगले 5 सालों में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन के जरिए 86 नए शहरों में 10000 स्टेशंस खोलने की योजना है। उन्होंने बताया कि सीबीजी से कचरा प्रबंधन के साथ कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण में कमी आएगी। इसके अलावा किसानों के लिए कमाई के अतिरिक्त साधन भी बढ़ेंगे। वहीं जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को भी समर्थन मिलेगा।