हाल ही में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने अपनी रिपोर्ट में 2021 में ऊर्जा खपत से 1.5 अरब टन कार्बन उत्सर्जन का अनुमान जताया है। एजेंसी के मुताबिक, ऊर्जा उत्सर्जन में यह इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी वृद्धि होगी।
एजेंसी के कार्यकारी निदेशक फतिह बिरोल का कहना है कि कोरोना महामारी से उबर अर्थव्यवस्था हमारी जलवायु के लिए कतई टिकाऊ नहीं है। अगर सरकारें तेजी से कार्बन उत्सर्जन में कटौती नहीं करेंगी तो 2022 में हमें ज्यादा खराब स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
आईईए की यह चेतावनी इस हफ्ते विश्व के 40 बड़े नेताओं की जलवायु संकट पर दो दिवसीय बैठक से ठीक पहले आई है। ऐसे में एजेंसी ने जलवायु बचाने लिए स्पष्ट और तात्कालिक कदम उठाने की जरूरत है।
साढ़े चार फीसदी बढ़ेगी ऊर्जा की मांग
बीते साल दुनियाभर में लॉकडाउन के कारण गैसीय उत्सर्जन कम हो गया था लेकिन ज्यों ही लोगों की आवाजाही शुरू हुई और औद्योगिक गतिविधियां रफ्तार पकड़ने लगीं तो इसमें तेजी आने लगी। आईईए का अनुमान है कि इस साल वैश्विक ऊर्जा मांग 2019 से स्तर को पास करते हुए 4.6 फीसदी तक बढ़ेगी। इसका कारण विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्था में ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ना है।