केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'आईटीबीपी' में एक कमांडेंट ने अपने ही जूनियर अधिकारी यानी सहायक कमांडेंट की वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन 'एपीएआर' में 3.69 नंबर दिए। इसके बाद जब वह फाइल डीआईजी और आईजी के पास पहुंची, तो नंबर 'जीरो' हो गए। यह बात सहायक कमांडेंट मनुदेव दहिया के लिए अत्यधिक पीड़ादायक रही। इस रिपोर्ट से पहले और उसके बाद भी मनुदेव की 'एपीएआर' शानदार रही थी। 39वीं बटालियन के कमांडेंट राजेश कुमार तोमर ने जानबूझकर एवं तथ्यों को तोड़ मरोड़कर मनुदेव की रिपोर्ट खराब की थी। मामला दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष पहुंच गया और आखिर में सहायक कमांडेंट मनुदेव को न्याय मिला। अदालत ने उन्हें तय तिथि से पदोन्नति एवं दूसरे वित्तीय फायदे देने के लिए कहा है। साथ ही इस तरह का मामला दोबारा से न देखने को मिले, इसके लिए सभी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के प्रमुखों को फैसले की कॉपी और हिदायत दी गई है।
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अदालत ने साफतौर पर कहा है कि जब भी कोई सीनियर अधिकारी, अपने जूनियर के खिलाफ कार्रवाई करे तो उसे यह बात दिमाग में रखनी चाहिए कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने 18 जुलाई को दिए अपने फैसले में कहा है, अगर इस तरह के मामले को अदालत के समक्ष चुनौती दी जाती है, तो निश्चित तौर पर अदालत उस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का आदेश देने से नहीं हिचकेगी, जिसने वह गलती की है। आईटीबीपी के सहायक कमांडेंट मनुदेव ने कोर्ट में याचिका लगाई थी। मनुदेव, 2009 में सीधी भर्ती के तहत सहायक कमांडेंट के पद पर भर्ती हुए थे। वे 35वीं बटालियन में तैनात थे। वहां से उनका तबादला 39वीं बटालियन, ग्रेटर नोएडा में कर दिया गया। उन्होंने अपनी ड्यूटी का निर्वहन बेहतर तरीके से किया। कंपनी कमांडर के तौर पर उनका प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा में तैनात यूनिट में सहायक कमांडेंट इंटेलिजेंस/ऑपरेशन, की जिम्मेदारी शानदार तरीके से पूरी की। उन्हें अपनी वार्षिक रिपोर्ट में 'वेरी गुड' मिला। आईजी द्वारा उन्हें प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया।
19 जून 2014 से 8 नवंबर 2014 के बीच में उनके कमांडेंट राजेश कुमार तोमर थे। उन्होंने जानबूझकर मनुदेव की वार्षिक रिपोर्ट में खराब अंक दे दिए। उक्त अवधि के लिए उन्हें 'जीरो' मिला। अगस्त 2015 में उन्होंने आईजी सेंट्रल फ्रंटियर को अपना प्रतिवेदन दिया। उसमें सहायक कमांडेंट ने उन सभी बातों का जिक्र किया था, जिनसे पता चलता था कि उनकी रिपोर्ट को जानबूझकर खराब किया गया है। उनका प्रतिवेदन अस्वीकार कर दिया गया। डीआईजी एससी ममगईं ने भी इस मामले में कई टिप्पणियां कर दीं।
खास बात है कि इस अवधि से पहले कमांडेंट ऋषिराज सिंह ने उन्हें 8.3 अंक दिए थे। इसके बाद कमांडेंट तोमर ने उन्हें 3.69 अंक दे दिए, जो बाद में जीरो हो गए। उसके बाद आए कमांडेंट अनिल कुमार ने उन्हें 7.84 अंक दिए थे। अपने एक साल के कार्यकाल के दौरान कमांडेंट मनीष कुमार ने उन्हें 8.97 अंक दिए थे। तोमर ने अपने जूनियर अधिकारी को कोई कारण बताओ नोटिस भी नहीं दिया। बाद में इस तरह के नोटिस को बैक डेट के जरिए तैयार कराया गया। इस तरह से कमांडेंट तोमर को कई दूसरी अनियमित्ताएं सामने आईं। हालांकि इस केस के दौरान किसी दूसरे मामले में उन्हें नौकरी से डिसमिस कर दिया गया। अदालत ने कहा है कि मनुदेव के मामले को लेकर विभागीय पदोन्नति कमेटी बैठे और उन्हें डिप्टी कमांडेंट के लिए उनके केस पर विचार करें। तय समय से उन्हें सभी फायदे दिए जाएं।