केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी अर्धसैनिक बलों और असम राइफल के लिए एक अनूठी योजना लागू की है। इन बलों में सिपाही से लेकर उप निरीक्षक यानी एसआई तक के रैंक वाले कार्मिक इस योजना के दायरे में आएंगे। योजना के मुताबिक, सिपाही से एसआई तक के कार्मिकों को अपनी रिटायरमेंट के दिन पदोन्नति मिलेगी। मतलब, उन्हें एक दिवसीय पदोन्नति दी जाएगी। वे 24 घंटे के लिए एक पद ऊपर वाला रैंक यानी 'मानद पद' (ऑनरेरी रैंक) लगा सकेंगे। जैसे कोई सिपाही है तो उसे हवलदार का 'मानद पद' मिलेगा। एएसआई है तो उसे एसआई का 'मानद पद' दिया जाएगा। खास बात है कि सीएपीएफ और असम राइफल में यह एक दिन वाला 'मानद रैंक' बिना किसी वित्तीय या पेंशन लाभ के प्रदान किया जाएगा।
सबसे पहले सीआरपीएफ डीजी ने की थी घोषणा
देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' के महानिदेशक अनीश दयाल सिंह 31 दिसंबर 2024 को रिटायर हो गए थे। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के मौके पर एक अहम घोषणा की थी। उस घोषणा में कहा गया था कि सीआरपीएफ में सिपाही से लेकर सब इंस्पेक्टर तक अपनी रिटायरमेंट से तीस दिन पहले अपने कंधे पर अगला रैंक लगा सकते हैं। यानी कोई सिपाही है तो वह हवलदार का रैंक लगा सकता है। हवलदार, एएसआई का रैंक लगाएंगे और एसआई, इंस्पेक्टर का रैंक लगाएंगे। यह योजना सीआरपीएफ और आईटीबीपी के अलावा दूसरे केंद्रीय अर्धसैनिक बलों पर भी लागू होने की बात कही गई।
30 दिन पहले रैंक देने की हुई थी घोषणा
उस योजना का मकसद, उन जवानों का हौसला बढ़ाना था, जो किन्हीं कारणों से पदोन्नति नहीं ले पाए। हालांकि उस योजना में एक शर्त भी रखी गई थी कि तीस दिन पहले रैंक लेने वाले कार्मिक, मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (एमएसीपी) योजना के तहत आने चाहिएं। यानी उन्हें एमएसीपी मिल रहा हो, लेकिन किन्हीं वजह से उस रैंक की पदोन्नति नहीं मिल सकी। पूर्व डीजी अनीश दयाल सिंह ने अपने एक वीडियो संदेश में कहा था, यह पहल जवानों का मनोबल बढ़ाने के लिए है। जब वे रिटायरमेंट पर अपने घर जाएं तो उनके परिजनों, दोस्तों और रिश्तेदारों को यह खुशी हो कि उनका अपना इस रैंक से रिटायर हुआ है। रिटायरमेंट होने वाले व्यक्ति को भी यह अहसास हो कि उसके साथ न्याय हुआ है। डीजी ने कहा था, पहले इस योजना का प्रारूप आईटीबीपी के लिए भेजा गया था।
इस वजह से नहीं मिल पाता रैंक
किसी भी कर्मचारी को नियमित सेवा में 10, 20, या 30 साल पूरे होने पर अगले उच्च ग्रेड वेतन और ग्रेड वेतन में वित्तीय उन्नयन मिलता है। फोर्स में वैकेंसी बेस्ड पदोन्नति मिलती है, ऐसे में बहुत से कार्मिक ऐसे होते हैं, जिन्हें 10, 20, या 30 वर्ष के बाद अगला रैंक नहीं मिल पाता, लेकिन आर्थिक फायदा मिल जाता है। ऐसे ही कार्मिकों को अब उनकी रिटायरमेंट से तीस दिन पहले अगला रैंक मिल जाएगा।
कार्मिकों ने बताया था एक मजाक
इस बाबत कार्मिकों और अधिकारियों अलग अलग राय है। तब कार्मिकों का कहना था कि तीस दिन पहले रैंक देना एक मजाक सा दिखाई पड़ रहा है। सीआरपीएफ में कई रैंक ऐसे हैं, जहां डेढ़ दशक बाद भी पदोन्नति नहीं मिल पा रही। बीएसएफ और सीआरपीएफ में इंस्पेक्टर को 13 से 15 साल बाद भी पदोन्नति नहीं मिल सकी है। इसी तरह इन बलों में सहायक कमांडेंट को 15 वें साल में भी डिप्टी कमांडेंट की पदोन्नति नहीं मिल सकी है। कई बलों में सिपाही और हवलदार को भी पहली पदोन्नति के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
अब अंतिम दिन मिलेगा मानद पद
कुछ कार्मिकों का कहना था कि एक माह पहले अगला रैंक लगाकर वे अपने घर जाएंगे, ये भी ठीक है। नहीं से अच्छा तो हां है। भले ही तीस दिन पहले ही सही, वे अगला रैंक लगा सकेंगे। डीजी ने अपने संदेश में कहा था कि इस योजना को लेकर गृह मंत्रालय का रूख सकारात्मक है। केंद्रीय गृह मंत्री ने भी इस बाबत अपनी सहमति दे दी है। हालांकि तब तक इस योजना को लेकर कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुए थे। तत्कालीन डीजी ने उम्मीद जताई थी कि जल्द ही यह आदेश जारी हो जाएगा। अब जो कार्यालय ज्ञापन जारी हुआ है, उसमें तीस दिन पहले नहीं, बल्कि रिटायरमेंट के दिन ही मानद रैंक देने की बात कही गई है।