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CAPF: 40 साल बॉर्डर की चौकीदारी करने वाले जवानों का बिना OPS कैसे कटेगा बुढ़ापा, जंतर-मंतर पर करेंगे प्रदर्शन

सार

 CAPF: अलॉयंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा इस बाबत वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक ईमेल भेजी गई है। इसमें आग्रह किया गया है कि आगामी केंद्रीय बजट में अर्धसैनिक बलों में पुरानी पेंशन बहाल की जाए।
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पेंशन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवान, जो लगभग चालीस वर्ष, बर्फीले बॉर्डर, पहाड़, नदी, दलदल व जंगल के क्षेत्रों में सीमा की चौकीदारी करते हैं, अब अपनी रिटायरमेंट पर उन्हें बिना 'पुरानी पेंशन' के घर लौटना पड़ रहा है। उनके सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि अब उनका बुढ़ापा कैसे कटेगा। अलॉयंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा इस बाबत वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक ईमेल भेजी गई है। इसमें आग्रह किया गया है कि आगामी केंद्रीय बजट में अर्धसैनिक बलों में पुरानी पेंशन बहाल की जाए। जवानों के साथ ही केंद्र सरकार के अन्य कर्मचारी और पेंशनर के बतौर डीए/डीआर का बकाया, 34,402.32 करोड़ रुपये लौटाए जाएं। अगर सरकार, सीएपीएफ में पुरानी पेंशन बहाल नहीं करती है तो 6 अप्रैल को पूर्व अर्धसैनिक, दिल्ली के जतंर-मंतर पर दहाड़ेंगे। 

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अलॉयंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने अपने ईमेल में लिखा है, केंद्रीय कर्मचारियों व सरहदी सिपाहियों का बकाया डीए/डीआर भुगतान जारी किया जाए। सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनर्स के कोरोना महामारी के दौरान जनवरी 2020 से जून 2021 तक 18 महीने के डीए और डीआर के भुगतान पर रोक लगा दी थी। अब उस राशि का भुगतान किया जाए। उन्होंने केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों के लिए पुरानी पेंशन बहाली को आवश्यक बताया है। इन बलों के जवान 40 साल बॉर्डर की चौकीदारी करने उपरांत जब अपने घर जाते हैं तो उनके मन में एक ही सवाल उठता है कि पुरानी पेंशन बहाली के बिना उनका बुढ़ापा कैसे कटेगा। 

वित्त मंत्री से आग्रह किया गया है कि आगामी बजट सत्र के दौरान 8वें वेतन आयोग के गठन की घोषणा की जाए। उन्होंने केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों के बेहतर वेतन भत्ते व अन्य सुविधाओं के लिए अलग से वेतन सैल बनाए जाने की उम्मीदें जताई। ईमेल की प्रति पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को भी भेजी गई हैं। डीए के एरियर का मुद्दा पहले भी कई बार उठाया जा चुका है। 'नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्सन' (एनजेसीए) के वरिष्ठ सदस्य एवं अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव सी.श्रीकुमार ने बताया, कर्मियों के हितों से जुड़े मुद्दे, जिसमें पुरानी पेंशन बहाली सहित कई दूसरी मांगें शामिल हैं, लगातार उठाए जा रहे हैं। इन सबके साथ ही कोरोनाकाल में रोके गए 18 महीने के डीए/डीआर के भुगतान की लड़ाई भी जारी है। कैबिनेट सचिव को 'स्टाफ साइड' की राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) द्वारा 18 माह के डीए एरियर के भुगतान के लिए पहले ही लिखा जा चुका है। इस बाबत वित्त मंत्रालय को भी प्रतिवेदन दिया गया है। केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला भी दिया है। इसके बावजूद सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। 
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केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनर्स, कोरोनाकाल में रोके गए 18 महीने के डीए एरियर के भुगतान को लेकर लंबे समय से मांग कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने बजट सत्र में यह बात मानी थी कि डीए की बकाया राशि जारी करने के लिए कई कर्मचारी संगठनों की ओर से आवेदन मिले हैं। हालांकि सरकार ने इस संबंध में कोई ठोस भरोसा देने की बजाए साफ तौर से कह दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में डीए के एरियर को जारी करना व्यावहारिक नहीं है। मतलब, केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को 34 हजार करोड़ रुपये से अधिक की डीए/डीआर राशि का भुगतान नहीं करेगी। गत बजट सत्र के दौरान वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा था, अभी भी केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा एफआरबीएम अधिनियम में दर्शाए स्तर से दोगुने से अधिक चल रहा है। ऐसे में डीए/डीआर का एरियर देना संभव नहीं है। 

श्रीकुमार बताते हैं, सुप्रीम कोर्ट का फैसला है कि ऐसे मामलों में कर्मचारी को छह फीसदी ब्याज के साथ उसका भुगतान करना होता है। केंद्र सरकार ने कोरोनाकाल के दौरान जनवरी 2020 से जून 2021 तक 18 महीने का महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की 3 किस्तें रोक ली थी। उस वक्त सरकार ने आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की बात कही थी। राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) की बैठक में इस मुद्दे को उठाया गया था। कर्मियों को उम्मीद थी कि उन्हें बकाया राशि मिल जाएगी, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।

सी. श्रीकुमार के मुताबिक, सरकार के मन में खोट आ चुका है। केंद्र ने 2020 के प्रारंभ में कोविड-19 की आड़ लेकर सरकारी कर्मियों और पेंशनरों के डीए/डीआर पर रोक लगा दी थी। उस वक्त कर्मियों के 11 फीसदी डीए का भुगतान रोक कर केंद्र सरकार ने करोड़ों रुपये बचा लिए थे। उसके बाद कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने 18 माह के एरियर के भुगतान को लेकर सरकार को कई तरह के विकल्प सुझाए थे। इनमें एरियर का एकमुश्त भुगतान करना भी शामिल था।

कोरोनाकाल के बाद केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने यह घोषणा की थी कि कर्मचारियों को 28 फीसदी के हिसाब से महंगाई भत्ता मिलेगा। उस वक्त उन्होंने एरियर को लेकर कोई बात नहीं कही। केंद्रीय मंत्री की घोषणा का अर्थ यह था कि बढ़े हुए डीए की दर एक जुलाई 2021 से 28 फीसदी मान ली जाए। इसके अनुसार जून 2021 और जुलाई 2021 के बीच डीए में एकाएक 11 फीसदी वृद्धि हो गई, जबकि डेढ़ साल की अवधि में डीए की दरों में कोई वृद्धि दर्ज नहीं की गई। एक जनवरी 2020 से लेकर एक जुलाई 2021 तक डीए/डीआर फ्रीज कर दिया गया था। कोरोना संक्रमण काल में डीए की तीन किस्त (1 जनवरी 2020, 1 जुलाई 2020, 1 जनवरी 2021) रोक दी गई थी। इसके बाद सरकार ने जुलाई 2021 में महंगाई भत्ते को बहाल कर दिया था। तब 18 महीने की बकाया तीन किस्तों का पैसा देने पर सरकार चुप हो गई। 

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के 11 लाख जवानों/अधिकारियों को पुरानी पेंशन के मामले में गत वर्ष भी राहत नहीं मिल सकी। इन बलों में 'पुरानी पेंशन' बहाली का मुद्दा, सालभर चर्चा में रहा था। संसद सत्र में भी यह मुद्दा उठाया गया। 'अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन' के अलावा विभिन्न केंद्रीय कर्मचारी संगठनों ने इन बलों में पुरानी पेंशन बहाल करने के लिए आवाज उठाई। फिलहाल ये मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने एक अहम फैसले में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों 'सीएपीएफ' को 'भारत संघ के सशस्त्र बल' माना था। हाईकोर्ट ने इन बलों में लागू 'एनपीएस' को स्ट्राइक डाउन करने की बात कही। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था, चाहे कोई आज इन बलों में भर्ती हुआ हो, पहले कभी भर्ती हुआ हो या आने वाले समय में भर्ती होगा, सभी जवान और अधिकारी, पुरानी पेंशन स्कीम के दायरे में आएंगे। सरकार ने इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट में स्टे ले लिया। अभी यह मामला सर्वोच्च अदालत में ही विचाराधीन है। 

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