केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में पुरानी पेंशन की बहाली को लेकर विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में पूर्व अर्धसैनिक परिवार 14 फरवरी को जंतर-मंतर पर पहुंचेंगे। कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस मार्टियरस वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा आयोजित रैली में पहले सीआरपीएफ के उन 40 जवानों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी जाएगी, जो 14 फरवरी को पुलवामा में हुए आतंकियों के आत्मघाती हमले में शहीद हो गए थे।
एसोसिएशन के चेयरमैन एवं पूर्व एडीजी 'सीआरपीएफ' एचआर सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा, अब केंद्र व राज्य सरकारें ज्यादा दिनों तक 20 लाख पैरामिलिट्री जवानों व उनके परिवारों की भलाई से संबंधित मुद्दों पर आंख नहीं मूंद सकेंगे। आने वाले 9 राज्यों के विधानसभा चुनाव और 2024 के आम चुनाव में अर्धसैनिक बल परिवार, निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा, देशभर के तकरीबन सभी हिस्सों से हजारों की संख्या में पैरामिलिट्री परिवार दिल्ली के लिए कूच करेंगे। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 11 जनवरी को अपने एक फैसले में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों 'सीएपीएफ' को 'भारत संघ के सशस्त्र बल' माना है। इन बलों में लागू 'एनपीएस' को स्ट्राइक डाउन करने की बात कही गई है। अदालत ने अपने फैसले में कहा था, चाहे कोई आज इन बलों में भर्ती हुआ हो, पहले कभी भर्ती हुआ हो या आने वाले समय में भर्ती होगा, सभी जवान और अधिकारी, पुरानी पेंशन स्कीम के दायरे में आएंगे। केंद्र ने अभी तक इस बाबत कोई निर्णय नहीं लिया है। उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को इस फैसले का पालन करने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया है। यह अवधि होली के दिन खत्म हो रही है।
दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को अविलंब लागू करने के लिए 14 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन सौंपा जाएगा। एसोसिएशन ने पहले ही यह घोषणा कर रखी है कि 'पुरानी पेंशन' बहाल नहीं होने की स्थिति में 20 लाख पैरामिलिट्री परिवार होली नहीं मनाएंगे। विपक्षी नेताओं द्वारा भी इस मुद्दे को लगातार उठाया जा रहा है। दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद भी संसद में यह जवाब दिया जाता है कि ये केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत पॉलिसी मैटर है। दूसरी ओर पीएम मोदी राज्यसभा में पेंशन स्कीम को आने वाली पीढ़ियों पर भार बताते हैं। वे राज्यों को सलाह देते हैं कि तात्कालिक फायदे के लिए ऐसा पाप न करें। बतौर रणबीर सिंह, देश की सीमाओं की रक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने में अहम योगदान देने वाले इन बलों में पुरानी पेंशन बहाली करनी होगी।
रणबीर सिंह ने कहा, इस साल नौ राज्यों के विधानसभा चुनाव हैं। सरकार को याद रखना चाहिए कि पैरामिलिट्री जवान इन चुनावों को निष्पक्ष ढंग से कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बाद अगले वर्ष लोकसभा चुनाव है। पूर्व एडीजी एचआर सिंह ने कहा, अब केंद्र व राज्य सरकारें ज्यादा दिनों तक 20 लाख पैरामिलिट्री जवानों व उनके परिवारों को अंधेरे में नहीं रख सकती। उनकी लंबित मांगों को दरकिनार नहीं किया जा सकता।
हालांकि यह एसोसिएशन, किसी पार्टी विशेष से नहीं जुड़ी है, लेकिन अधिकांश विपक्षी दल, ओपीएस पर अर्धसैनिक परिवारों के साथ हैं। इन बलों के लिए न तो अर्ध सैनिक कल्याण बोर्ड हैं और न ही अर्ध सेना झंडा दिवस कोष स्थापित किया गया है। अर्धसैनिक स्कूल भी नहीं हैं। सीपीसी कैंटीन को जीएसटी से छूट नहीं मिलती। इन मांगों को लेकर राष्ट्रपति से लेकर गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, और वित मंत्री को ज्ञापन दिया जा चुका है, मगर कुछ नहीं हुआ। जंतर मंतर पर एसोसिएशन द्वारा इस मुद्दे पर आगामी रणनीति की घोषणा के साथ साथ नई स्टीयरिंग कमेटी का एलान किया जाएगा।