गुजरात के गिर अभयारण्य में 21 दिनों में 23 शेरों की मौत की वजह बने खतरनाक कैनाइन डिस्टैंपर वायरस का फिलहाल न कोई इलाज है न उसका संक्रमण रोकने के लिए कोई वैक्सीन। गुजरात से एक शेरनी के शव के सैंपल लेकर लौटी भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के विशेषज्ञों की टीम उसकी गहनता से जांच कर रही है। विशेषज्ञों ने कहा, गिर अभयारण्य में संक्रमण से प्रभावित शेरों को स्वस्थ शेरों से अलग रखने की कोशिश की जा रही है, लेकिन यह काम पूरी तरह संभव न होने की वजह से अन्य शेरों के जीवन पर अब भी खतरा बना हुआ है। पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरलॉजी (एनआईवी) ने मृत शेरों की जांच के बाद उनमें कैनाइन डिस्टैंपर नाम का वायरस मिलने की पुष्टि कर वन्य जीव विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक काफी खतरनाक किस्म का यह वायरस शेर, बाघ और गुलदार जैसे वन्य जीवों की प्रतिरोधक क्षमता को कुछ ही दिन में खत्म कर देता है, जिस वजह से उनकी मौत हो जाती है। गिर अभयारण्य में शेरों की मौत की जांच करने गई आईवीआरआई के वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम में शामिल डॉ. एके शर्मा का कहना है कि एनआईवी की जांच को नकारा तो नहीं जा सकता लेकिन आईवीआरआई अपने स्तर पर भी इसकी पुष्टि करना चाहता है।
डॉ. शर्मा ने यह भी कहा कि आईवीआरआई में कई स्तर पर जांच के बाद ही अंतिम नतीजे पर पहुंचा जा सकेगा। आईवीआरआई के निदेशक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि गुजरात से लौटी विशेषज्ञों की टीम शेर के शव के सैंपल की जांच करा रही है। अभी तक इसकी रिपोर्ट नहीं आई है इसलिए अभी कुछ कहना ठीक नहीं है। हमने गुजरात के वन अधिकारियों को संक्रमित शेरों को बाड़ा बनाकर उन्हें अलग रखने को कहा है।