कोर्ट ने कहा है कि संविधान का अनुच्छेद-16(4) राज्य सरकार को पिछले वर्ग के लोगों को नौकरी में आरक्षण देने को लेकर प्रावधान बनाने का अधिकार देता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पाया कि गुजरात सरकार ने साफ कर दिया था कि अनुचित जाति-अनुसूचित जनजाति और आर्थिक व सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थी अगर उम्र सीमा, शैक्षणिक योग्यता, परीक्षा में बैठने की संख्या सीमा में छूट का लाभ लेता है तो उन अभ्यर्थियों को आरक्षित पदों के लिए ही विचार किया जाएगा। उन्हें सामान्य श्रेणी में नहीं शामिल किया जा सकता।