अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थिति एक कैंसर संस्थान के डॉक्टरों ने रेक्टल कैंसर की दवा बनाकर पूरी दुनिया में इस बीमारी को खत्म करने का दावा किया है। इस दवा को लेकर देश के डॉक्टरों ने इसे बहुत बड़ी उम्मीद बताया है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस दवा का फॉर्मूला न सिर्फ रेक्टल कैंसर बल्कि अन्य तरह के कैंसर को खत्म करने में बहुत ही कारगर होगा। देश के कई प्रमुख चिकित्सा संस्थान भी अलग अलग तरह से कैंसर के इलाज में शोध कर रहे हैं।
बड़े स्तर पर शोध करने पर ही मिलेगा सही अंदाजा
अमेरिका के एक कैंसर इंस्टिट्यूट में रेक्टल कैंसर को दवा के माध्यम से सही करने का दावा किया गया है। शोध करने वाले डॉक्टरों का दावा है कि छह महीने तक दी गई दवा से रेक्टल कैंसर की कोशिकाएं पूरी तरीके से नष्ट हो गईं और मरीजों में यह बीमारी पूरी तरीके से खत्म हो गई। शोध के नतीजों के बाद अब पूरी दुनिया में इस दवा और उसके परिणामों को लेकर के चर्चाएं शुरू हुई हैं। देश के प्रमुख कैंसर रोग विशेषज्ञ और चंडीगढ़ पीजीआई के हेमेटोलॉजी ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर पंकज मल्होत्रा कहते हैं कि अमेरिका के न्यूयॉर्क में तैयार की गई दवा को कैंसर के इलाज में बड़ी उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा है। वह कहते हैं कि निकट भविष्य में ऐसे शोध होते रहें, ताकि कैंसर जैसी बीमारियों को जड़ से समाप्त किया जा सके। हालांकि प्रोफेसर पंकज का कहना है कि अब तक के मिले प्रमाणों और शोध के परिणामों के अनुसार यही पुष्टि हुई है कि कैंसर की कोशिकाओं को खत्म करने के लिए दवाओं के साथ-साथ तमाम तरीके की अन्य थेरेपी का भी इस्तेमाल किया जाता रहा है। उनका कहना है कि इस बार सिर्फ दवा से ही कैंसर को खत्म करने का दावा किया गया है। उनका कहना है कि इस दवा के अगले चरण के ट्रायल और बेहतर परिणामों के साथ सामने आएंगे, ऐसी उम्मीद है।
अमेरिका में हुए शोध पर ऑन्कोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के वरिष्ठ सदस्य डॉक्टर एसएन प्रीतम कहते हैं कि जो शोध अमेरिका के एक कैंसर इंस्टिट्यूट का आया है उसकी संख्या बहुत कम है। ऐसे में अभी इस पर और शोध की आवश्यकता है। हालांकि उनका कहना है चिकित्सकों की रिसर्च आगे भी इस पर जारी रहेगी। डॉक्टर प्रीतम ने अमेरिका में किए गए 18 मरीजों की सफल स्टडी पर सवाल तो नहीं उठाया लेकिन उनका कहना है कि मरीजों की संख्या फिलहाल कम है। उनका कहना है अगर बाकी मरीजों में भी यह शत प्रतिशत सफल रहा है तो आने वाले दिनों में यह दवा अन्य तरह के कैंसर में भी फायदेमंद हो सकती है।
स्टेज के मुताबिक होता है इलाज
कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉक्टर पंकज कहते हैं इस बीमारी के लक्षणों के आधार पर फिजिकल टेस्ट के साथ-साथ बायोप्सी का सहारा लिया जाता है। अगर मरीज को कैंसर होता है तो सबसे पहले इस बात की पुष्टि की जाती है कि मरीज को किस स्तर का कैंसर है। कैंसर के प्रथम, द्वितीय, तृतीय चरण होते हैं। डॉक्टर पंकज कहते हैं कि मरीज में कैंसर की स्टेज के मुताबिक ही उसका इलाज शुरू किया जाता है। जिसमें दवाओं से लेकर कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी का इस्तेमाल होता है। वह कहते हैं कि अपने देश में भी कैंसर की कई दवाओं का शोध हुआ है। इसमें कुछ दवाएं मरीजों के लिए कारगर भी साबित हुई हैं। आईसीएमआर और साइंस एंड टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के साथ मिलकर देश के चुनिंदा मेडिकल इंस्टिट्यूट कैंसर जैसी गंभीर बीमारी पर लगातार रिसर्च कर रहे हैं। कैंसर रोग विशेषज्ञों का मानना है कि निश्चित तौर पर आने वाले दिनों में इसके उपचार में और इस को जड़ से खत्म करने में सफलता भी मिलेगी।