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Cancer: 'कैंसर' ने 3 वर्ष में 44 लाख से अधिक लोगों को अपनी चपेट में लिया, अब रूस की इस दवा पर टिकी निगाहें

सार

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने बताया है कि रूस ने हाल ही में कैंसर के उपचार और इलाज के लिए एक व्यक्तिगत एमआरएनए वैक्सीन विकसित करने की घोषणा की है। हालांकि, एमआरएनए वैक्सीन के क्लिनिकल परीक्षण चल रहे हैं और वैक्सीन को अभी लांच किया जाना बाकी है। 
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कैंसर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश में कैंसर के मामलों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। साल 2022 के दौरान कैंसर के अनुमानित मामलों की संख्या 1461427 थी। 2023 में यह संख्या 1496972 और 2024 में बढ़कर 1533055 हो गई। कैंसर के टॉप 10 मामलों में उत्तर प्रदेश पहले नंबर पर है, जबकि महाराष्ट्र का नंबर दूसरा है। कैंसर के मामलों में पश्चिम बंगाल तीसरे स्थान पर है तो वहीं बिहार चौथे स्थान पर है। तमिलनाडु का नंबर पांचवां है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, कैंसर के इलाज की दिशा में कई तरह की पहल कर रहा है। मंत्रालय की नजर, रूस द्वारा ईजाद की गई कैंसर की दवा पर है। 

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मंगलवार को संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में बताया गया कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा सूचित किया गया है कि रूस ने हाल ही में कैंसर के उपचार और इलाज के लिए एक व्यक्तिगत एमआरएनए वैक्सीन विकसित करने की घोषणा की है। हालांकि, एमआरएनए वैक्सीन के क्लिनिकल परीक्षण चल रहे हैं और वैक्सीन को अभी लांच किया जाना बाकी है। 

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, भारत सरकार राज्यों और संघ राज्य क्षेत्र को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के भाग के रूप में राष्ट्रीय गैर-संचारी रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम (एनपी-एनसीडी) के तहत तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करता है। एनपी-एनसीडी के तहत 770 जिला अस्पतालों और 6410 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एनसीडी क्लीनिक स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त जिला अस्पतालों में कीमोथेरेपी के लिए 372 जिला डे केयर सेंटर स्थापित किए गए हैं। 
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आयुष्मान आरोग्य मंदिर योजना के माध्यम से व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य परिचर्चा के तहत गैर-संचारी रोगों के निवारक पहलू को सुदृढ़ किया जाता है, जिसमें सामुदायिक स्तर पर कल्याण संबंधी कार्यकलापों और लक्षित संचार को बढ़ावा दिया जाता है। जन जागरूकता बढ़ाने और स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने के लिए अन्य पहलों में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय दिवसों को मनाना और निरंतर सामुदायिक जागरूकता के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया का उपयोग शामिल है। इसके अतिरिक्त, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के माध्यम से स्वस्थ खान पान को बढ़ावा दिया जाता है। फिट इंडिया अभियान युवा मामले और खेल मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जाता है। आयुष मंत्रालय द्वारा योग से संबंधित विभिन्न कार्यकलाप संचालित किए जाते हैं। 

सरकारी अस्पतालों में गरीबों और जरुरतमंदों के लिए उपचार निशुल्क या अत्यधिक सब्सिडी वाला होता है। भारत सरकार, कई माध्यमों के जरिए सुलभ और किफायती उपचार की सुविधा प्रदान करती है।

-उन्नत कैंसर परिचर्चा प्रदान करने के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों में 19 राज्य कैंसर संस्थान (एससीआई) और 20 विशिष्ट कैंसर परिचर्चा केंद्र (टीसीसीसी) स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही, निदान, चिकित्सा और शल्य चिकित्सा सुविधाओं के साथ सभी 22 नए एम्स में कैंसर उपचार सुविधा केंद्रों को अनुमोदित किया गया है। 

-सरकार द्वारा हरियाणा के झज्जर में राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (एनसीआई), जिसमें 1460 रोगी देखभाल बिस्तर और उन्नत निदान एवं उपचार सुविधा केंद्र हैं। कोलकाता में चित्तरंजन राष्ट्रीय कैंसर संस्थान का दूसरा परिसर, 460 बिस्तर वाले सुपर स्पेशियलिटी परिचर्चा प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया है। 

-प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) और किफायती दवाएं व उपचार के लिए विश्वसनीय प्रत्यारोपण (एएमआरईटी) फार्मेसियों के तहत जन औषधि केंद्रों (जेएके) के माध्यम से कैंसर की दवाओं सहित गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50 प्रतिशत से 80 प्रतिशत सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जाती है। कुछ कैंसर रोधी दवाओं को अधिक किफायती बनाने के लिए उन पर सीमा शुल्क तथा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कम कर दिया गया है। 

आईसीएमआर अपने संस्थानों, विभिन्न परियोजनाओं और कैंसर संघ के माध्यम से कैंसर पर अनुसंधान करता है। आईसीएमआर, विभिन्न कैंसरों के लिए अनुसंधान को वित्तपोषित कर रहा है। वर्तमान में मुख्य रूप से कैंसर निदान, कैंसर चिकित्सा और कैंसर जीवविज्ञान पर जोर दिया जा रहा है। यह कार्यक्रम सक्रिय रूप से नवीन, किफायती और सुलभ उपचारों के विकास को बढ़ावा देता है। 
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कैंसर के बढ़ते मामले, ये हैं टॉप 10 प्रदेश ...  

  • -उत्तर प्रदेश में अगर 2022 में देखें तो कैंसर के मामलों की संख्या 210958 थी, जबकि अगले ही वर्ष यह आंकड़ा 215931 पर पहुंच गया था। गत वर्ष कैंसर के मामलों की संख्या 221000 हो गई। 
  • -महाराष्ट्र में 2022 के दौरान कैंसर के मामलों की संख्या 121717 थी। अगले वर्ष यह आंकड़ा 124584 पर पहुंच गया था। इस राज्य में गत वर्ष कैंसर के मामलों की संख्या 127512 हो गई।  
  • -पश्चिम बंगाल में 2022 के दौरान कैंसर के मामलों की संख्या 113581 थी। अगले वर्ष यह आंकड़ा 116230 पर पहुंच गया था। इस राज्य में गत वर्ष कैंसर के मामलों की संख्या 118910 हो गई। 
  • -बिहार में 2022 के दौरान कैंसर के मामलों की संख्या 109274 थी। अगले वर्ष यह आंकड़ा 112180 पर पहुंच गया था। गत वर्ष कैंसर के मामलों की संख्या 115123 हो गई।  
  • -तमिलनाडु में 2022 के दौरान कैंसर के मामलों की संख्या 93536 थी। अगले वर्ष यह आंकड़ा 95944 पर पहुंच गया था। इस राज्य में गत वर्ष कैंसर के मामलों की संख्या 98386 हो गई।  
  • -कर्नाटक में 2022 के दौरान कैंसर के मामलों की संख्या 90349 थी। अगले वर्ष यह आंकड़ा 92560 पर पहुंच गया था। इस राज्य में गत वर्ष कैंसर के मामलों की संख्या 94832 हो गई।  
  • -मध्य प्रदेश में 2022 के दौरान कैंसर के मामलों की संख्या 81901 थी। अगले वर्ष यह आंकड़ा 84029 पर पहुंच गया था। इस राज्य में गत वर्ष कैंसर के मामलों की संख्या 86124 हो गई।  
  • -राजस्थान में 2022 के दौरान कैंसर के मामलों की संख्या 74725 थी। अगले वर्ष यह आंकड़ा 76655 पर पहुंच गया था। इस राज्य में गत वर्ष कैंसर के मामलों की संख्या 78604 हो गई। 
  • -गुजरात में 2022 के दौरान कैंसर के मामलों की संख्या 73382 थी। अगले वर्ष यह आंकड़ा 75290 पर पहुंच गया था। इस राज्य में गत वर्ष कैंसर के मामलों की संख्या 77205 हो गई।   
  • -आंध्र प्रदेश में 2022 के दौरान कैंसर के मामलों की संख्या 73536 थी। अगले वर्ष यह आंकड़ा 75086 पर पहुंच गया था। इस राज्य में गत वर्ष कैंसर के मामलों की संख्या 76708 हो गई। 
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