कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के पीछे भारत की साजिश का आरोप लगाते हुए मामलों को तल्खी दे दी। हालांकि, खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक कनाडा के पीएम जस्टिन ने इस तरीके का बयान महज सियासी दबाव के चलते ही दिया है। क्योंकि कनाडा की सरकार को इस बात की पहले से ही सबूत के साथ पूरी जानकारी दी जा चुकी है कि हरदीप सिंह निज्जर किस तरीके से कनाडा गुरुद्वारों के भीतर बड़ी सियासत के साथ न सिर्फ खालिस्तान समर्थकों की फौज तैयार कर रहा था। बल्कि इसका विरोध करने वालों से अपनी दुश्मनी भी मोल ले रहा था। खुफिया एजेंसियों से जुड़े रहे एक रिटायर्ड वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि निज्जर समेत उसके ही कुछ अन्य समर्थकों को स्थानीय लोगों ने गुरुद्वारा जैसे पवित्र स्थल में जहर बोने का काम करने पर धमकियां भी दी थीं। सूत्रों के मुताबिक जिस तरीके से निज्जर और उसका आतंकी संगठन कनाडा के गुरुद्वारों से साजिशों को आगे बढ़ा रहा था उन सभी मामलों की जानकारी कनाडा सरकार को पहले से ही दी जा चुकी है।
सरे स्थित गुरुद्वारे के परिसर का होता था साजिश के लिए इस्तेमाल
हरदीप सिंह निज्जर ब्रिटिश कोलंबिया के सरे स्थित गुरु नानक सिख गुरूद्वारा समिति का अध्यक्ष था। खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आतंकी साजिशों को अंजाम देने के लिए निज्जर और उसके सहयोगी इसी गुरुद्वारा परिसर का इस्तेमाल करते थे। जबकि इस गुरुद्वारे में आने वाले तमाम सिख समुदाय के लोगों ने इस पर आपत्ति जताई थी। बताया जा रहा है कि सरे के इसी गुरुद्वारा समिति में दूसरा सिख संगठन आगे जाकर पूरी बागडोर संभालना चाह रहा था। दूसरे सिख संगठन से जुड़े लोग नहीं चाहते थे की निज्जर पवित्र स्थल से किसी ऐसी नापाक हरकतों को अंजाम दे। सूत्रों का कहना है इसको लेकर निज्जर और उनके सहयोगियों का कुछ लोगों से विवाद भी हुआ था। अब इस घटना के पीछे उनका हाथ है यह तो स्थानीय स्तर पर जांच का विषय है। लेकिन यह बात बिल्कुल तय है की गुरुद्वारा समिति में दो गुटों में वर्चस्व का विवाद चल रहा था।
भारत ने कनाडा को पहले ही सौंप दिए थे सिख फॉर जस्टिस के साजिश के सबूत
खुफिया सूत्रों को कनाडा में गुरुद्वारों के भीतर सिख फॉर जस्टिस समेत कई अन्य खालिस्तानी समर्थक संगठनों की ओर से चलाई जा रही साजिश का भी बहुत पहले से इनपुट मिल रहा था। इसके आधार पर जुटाई गई पूरी जानकारी को सबूत के साथ कनाडा की सरकार को भारत सरकार ने पहले ही सौंपा था। सूत्रों के मुताबिकस निज्जर कनाडा के प्रमुख गुरुद्वारों में अपना वर्चस्व कायम करके खालिस्तान समर्थकों की बड़ी फौज तैयार कर रहा था। इसको लेकर अलग-अलग गुरुद्वारों में लगातार विवाद भी पनप रहे थे। केंद्रीय खुफिया एजेंसी से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि जी-20 के दौरान जब सिख फॉर जस्टिस ने ब्रिटिश कोलंबिया के सरे स्थित एक स्कूल में भारत के विरोध और खालिस्तान जनमत संग्रह करने की योजना बनाई तो उसको स्थानीय लोगों के विरोध के चलते ही रद्द करना पड़ा था। खुफिया एजेंसी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सिर्फ यही नहीं जब सरे में आतंकी निज्जर की हत्या हुई तो वहां पर निज्जर के समर्थकों ने लगातार कई दिनों तक माइक लगाकर वहां विरोध प्रदर्शन करना शुरू किया था। इस तरीके की गतिविधियों और भारत के खिलाफ लगातार की जा रही साजिशों का भी स्थानीय स्तर और सिख समुदाय ने जिम्मेदार प्रशासन और स्थानीय नेताओं से शिकायत भी दर्ज की थी।
प्रबंधन कमेटी के आपसी झगड़े का नतीजा है निज्जर की हत्या
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह कहते हैं कि कनाडा ने भारत के ऊपर जो आरोप लगाए हैं वह पूरी तरीके से निराधार है। उनका कहना है कि जब 2018 में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो भारत दौरे पर आए थे तो उन्होंने कुछ आतंकियों की लिस्ट उनको सौंपी थी। उन आतंकियों की लिस्ट में निज्जर का भी जिक्र था। पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह कहते हैं कि जिस आतंकी के लिए कनाडा ने भारत पर आरोप लगा दिए वह सिर्फ कनाडा की सियासत से प्रेरित है। कैप्टन कहते हैं कि दनिज्जर की हत्या सरे स्थित गुरुनानक गुरुद्वारा प्रबंधन के भीतर आपसी गुट के झगड़े का नतीजा है। कैप्टन अमरिंदर कहते हैं कि क्योंकि पंजाब के लोगों का कनाडा की राजनीति में बड़ा दखल है। भारी संख्या में कनाडा में पंजाब के लोग रहते हैं। सिख वोट बैंक पर कनाडा में सरकारों की दशा और दिशाएं तय होती हैं। ऐसे में इस वोट बैंक की खातिर कनाडा के प्रधानमंत्री ने भारत से डिप्लोमेटिक रिश्तो को दांव पर लगा दिया है।
केंद्रीय खुफिया एजेंसी को मिली जानकारी के मुताबिक कनाडा के उन गुरुद्वारों में अब ग्रंथियों और खालसा ने भी जाना बंद कर दिया है जहां पर आतंकियों की साजिशों को अंजाम दिया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक कनाडा के अलग-अलग राज्यों में ऐसे कई गुरुद्वारे हैं जहां पर निज्जर की हत्या के बाद भी बड़े स्तर पर न सिर्फ खालिस्तान के समर्थन में बड़ी सभाएं की जा रही हैं बल्कि देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है। खुफिया एजेंसी से जुड़े रहे वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि कनाडा में जिस तरीके से गुरुद्वारों में भारत के खिलाफ साजिश रची जा रही है उसे सिख समुदाय में आस्था रखने वाले ग्रंथियों और खालसा ने उन विवादित गुरुद्वारों में जाने से इनकार कर दिया है। जानकारी के मुताबिक निज्जर की हत्या के बाद उसके समर्थक लगातार अपना वर्चस्व बनाने के लिए कनाडा के गुरुद्वारों से खतरनाक खेल को अंजाम देने की बड़ी साजिश कर रहे हैं।
सियासी फायदे के लिए राजनयिक रिश्ते खराब कर रहे ट्रूडो: पूर्व राजनयिक
खुफिया एजेंसी के इनपुट के आधार पर कनाडा सरकार को गुरुद्वारों में चल रही अंदरूनी राजनीति के बारे में अपने खुफिया नेटवर्क के माध्यम से भी पूरी जानकारी मिल चुकी है। पूर्व राजनयिक और कनाडा में सेवाएं दे चुके देवेंद्र प्रसाद कहते हैं कि कनाडा के प्रधानमंत्री को सब कुछ जानकारी होने के बाद भी सियासी फायदे के चलते डिप्लोमेटिक रिश्ते को खराब करने की मजबूरी बन गई। वह कहते हैं कि जिस तरीके के हालात अभी बने हैं वह पहला मौका नहीं है। इससे पहले भी भारत लगातार कनाडा सरकार को उनकी जमीन पर भारत के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियान की जानकारी सबूत के साथ देती रही है। वह कहते हैं कि बीते दो दिनों के भीतर जिस तरीके से भारत और कनाडा के बीच माहौल बना है उसमें कनाडा सब कुछ जानते हुए भी अनजान बन रहा है। इसके पीछे कनाडा में सिखों की सियासत और उनके बड़े वोट बैंक की असली कहानी चल रही है।