देश की शीर्ष अदालत इस बात की जांच करेगी, क्या उसकी तरफ से मृत्युदंड की पुष्टि के खिलाफ रिट याचिका दायर की जा सकती है? बता दें कि, ये मामला में साल 2008 में एक बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले के दोषी वसंता संपत दुपारे की याचिका से जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट इस बात पर विचार करेगा कि क्या कोई रिट याचिका दायर कर उसकी तरफ से पहले से पुष्टि की गई मौत की सजा की समीक्षा की जा सकती है। यह मामला 2022 के फैसले से जुड़ा है, जिसमें कहा गया था कि मौत की सजा तय करते समय आरोपी के पक्ष में मौजूद नरमी के आधारों पर विचार करना जरूरी है।
नागपुर में बच्ची के दुष्कर्म और हत्या से जुड़ा केस
दरअसल, यह मामला नागपुर के दोषी वसंता संपत दुपारे से जुड़ा है, जिसे 2008 में एक चार साल की बच्ची को चॉकलेट का लालच देकर दुष्कर्म किया और शव की पहचान छिपाने के लिए उसके सिर को कुचलकर उसकी हत्या के मामले में मौत की सजा दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में उसकी सजा को बरकरार रखा था। बाद में, 2017 में उसकी पुनर्विचार याचिका भी खारिज कर दी गई थी। इसके बाद, उसकी दया याचिकाएं राज्यपाल और राष्ट्रपति ने 2022 और 2023 में ठुकरा दी थीं।
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आरोपी ने नई रिट याचिका की दाखिल
अब दोषी वसंता दुपारे ने एक नई रिट याचिका दाखिल कर सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि 2022 के फैसले को ध्यान में रखते हुए उसकी सजा पर पुनर्विचार किया जाए। इस पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संजय करोल और संदीप मेहता की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार के महाधिवक्ता की दलील सुनी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला अंतिम हो चुका है, उसे चुनौती देने के लिए रिट याचिका दायर नहीं की जा सकती। इसके बजाय, दोषी को पुनर्विचार याचिका दायर करनी चाहिए।
तीन अप्रैल को अगली सुनवाई की तारीख तय
न्यायमूर्ति नाथ ने भी इस पर सहमति जताते हुए कहा कि यदि ऐसा किया गया तो किसी भी बंद हो चुके मामले को अनुच्छेद 32 के तहत फिर से खोला जा सकेगा, जो एक खतरनाक परंपरा होगी। वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन, जो दुपारे का पक्ष रख रहे हैं, ने तर्क दिया कि पहले भी कुछ मामलों में रिट याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा के मामलों पर पुनर्विचार किया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने वकील को सुझाव दिया कि वे पुनर्विचार याचिका दाखिल करें। इस पर विचार करते हुए कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 3 अप्रैल तय की है।