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एलओसी ट्रेड : सीमापार से आ रहा कैलिफोर्निया का बादाम बन रहा आतंकी फंडिंग का जरिया

एजेंसी, नई दिल्ली Updated Sat, 20 Apr 2019 04:56 AM IST
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अपने उच्च पोषण वैल्यू के प्रसिद्ध कैलिफोर्निया बादाम जम्मू-कश्मीर में आतंकियों और अलगाववादियों की फंडिंग का जरिया बन रहा है। इसका सीमापार एलओसी से बड़े पैमाने पर व्यापार किया जाता है। केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर सलामाबाद और चक्कां-द-बाग केंद्र से होने वाले व्यापार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। यह आदेश शुक्रवार से लागू हो गया है। ऐसी खबरें थी कि सीमापार बैठे कुछ तत्व इसके जरिए कश्मीर में अवैध हथियार, मादक पदार्थों और नकली करेंसी की आपूर्ति कर रहे थे।  
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देश के कुल बादाम बाजार में करीब 73 फीसदी कब्जा कैलिफोर्निया के बादाम का है और यह बादाम पाकिस्तान के रास्ते देश में आ रहा है। एक सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक, पाकिस्तानी व्यापारी कैलिफोर्निया बादाम जैसे वस्तुओं का अंडर-चालान बनाते है। इसके बाद भारतीय पक्ष में व्यापारी कैलिफोर्निया बादाम को मौजूदा बाजार दाम पर बेचते हैं। 

यानी कम दाम में बादाम मंगाकर यहां भारी कीमत पर बेचा जाता है। इससे हुए मुनाफे का बड़ा हिस्सा आतंकवाद और अलगाववादी गतिविधियों पर खर्च किया जाता है। इस रकम का इस्तेमाल कश्मीर में देश विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने में किया जाता है।

आतंकी गुटों से जुड़े लोग शामिल हैं व्यापार में

अधिकारी के अनुसार, यह भी पता चला है कि एलओसी व्यापार में शामिल ज्यादातर पाकिस्तानी व्यापारी हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी गुटों के करीबी हैं। एनआईए ने भी अपनी जांच में खुलासा किया था कि जो लोग भारत से पाकिस्तान स्थित आतंकी गुटों में शामिल हो गए हैं, उन्होंने अपनी कंपनियां खोल ली हैं। ये कंपनियां आतंकियों के नियंत्रण में हैं और सीमापार व्यापार में शामिल हैं।  

400 करोड़ रुपये तक अलगाववादी, आतंकी गुटों तक पहुंचे

एक अनुमान के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में 350-400 करोड़ रुपये आतंकी और अलगाववादी गुटों तक पहुंचे हैं। एनआईए बारामुला और पुंछ के कई कारोबारियों से पूछताछ भी कर चुकी है और उड़ी व बारामुला के ट्रेड सेंटर से बड़ी मात्रा में दस्तावेज भी जब्त किए थे।  

हथियारों, कोकीन, ब्राउन सुगर, हेरोइन की हो रही तस्करी

साथ ही सीमापार व्यापार मार्ग का इस्तेमाल कोकीन, ब्राउन सुगर और हेरोइन जैसे मादक पदार्थों की तस्करी के लिए भी किया जा रहा है। इसका घाटी के युवाओं पर बुरा असर पड़ रहा है। हाल ही में 65.5 किलो हेरोइन कश्मीर घाटी की एक दुकान से जब्त हुई थी और पता चला था कि यह सीमापार व्यापार के जरिए लाई गई थी। इसके अलावा घाटी में हथियारों और गोलाबारूद की भी तस्करी इसी रास्ते से होती है। कई बार पिस्तौल, ग्रेनेड आदि जब्त किए गए हैं। इसके अलावा हाल ही में केले के ट्रक में भारी मात्रा में नकली करेंसी भी जब्त की गई थी।  

2008 से 2017 तक करोड़ों का कारोबार

एनआईए ने अपनी जांच में बताया था कि 2008 से 2017 तक सलामाबाद केंद्र से 4400 हजार करोड़ तथा चक्कां-द-बाग से 2542 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ। इस कारोबार की 15 से 20 फीसदी रकम आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल की गई।

एलओसी व्यापार एसोसिएशन का अध्यक्ष रहा वटाली जेल में बंद

आतंकी फंडिंग मामले में बिजनेसमैन जहूर अहमद वटाली इन दिनों जेल में बंद है। वह एलओसी व्यापार एसोसिएशन का अध्यक्ष भी रह चुका है। उस पर आतंकियों और अलगाववादियों को पैसा का आरोप है। ईडी ने उसकी करोड़ों की संपत्ति भी जब्त की है। अभी भी उसके खिलाफ जांच चल रही है। 

मिर्च, आम, जड़ी बूटियों और सूखे मेवे के व्यापार पर पड़ेगा असर

एलओसी से होने वाले व्यापार के स्थगित होने से लाल मिर्च, आम, जड़ी-बूटियों और सूखे मेवे समेत 21 वस्तुओं का कारोबार प्रभावित होगा। सरकार के कदम से करीब 280 कारोबारियों पर असर पड़ेगा। साल 2008 में कारोबार शुरू होने के बाद से यह 6,900 करोड़ रुपये के स्तर को छू चुका है। सीमापार व्यापार के लिए 21 वस्तुओं को सूचीबद्ध किया गया था। इनमें केला, कढ़ाई का सामान, इमली, लाल मिर्च और जीरा का निर्यात किया जाता है जबकि बादाम, सूखे खजूर, सूखा मेवा, जड़ी-बूटियों, आम और पिस्ता का आयात किया जाता है। 
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