कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्यपाल सीवी आनंद बोस पर छेड़छाड़ का आरोप लगाने वाली एक महिला को कथित तौर पर गलत तरीके से रोकने के मामले में राजभवन के एक अधिकारी के खिलाफ पुलिस जांच पर रोक लगा दी है। जस्टिस अमृता सिन्हा ने 17 जून तक जांच पर अस्थायी रोक लगाने का आदेश दिया।
जस्टिस सिन्हा की कोर्ट ने पुलिस को अब तक की गई जांच पर रिपोर्ट 10 जून को पेश करने का निर्देश दिया। इसी दिन मामले में सुनवाई होगी। विशेष ड्यूटी अधिकारी (ओएसडी) संदीप कुमार सिंह ने अपने खिलाफ कार्यवाही और दर्ज एफआईआर को रद्द करने की अपील करते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था।
पुलिस के अनुसार, 2 मई को महिला को गलत तरीके से रोककर राजभवन से निकलने से रोकने के आरोप में ओएसडी सहित तीन अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। महिला ने दो मई को राज्यपाल बोस पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। इसके बाद कोलकाता पुलिस ने जांच शुरू की। संविधान के अनुच्छेद 361 के अनुसार, किसी राज्यपाल के खिलाफ उसके कार्यकाल के दौरान कोई आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती है। सिंह और दो अन्य अधिकारियों ने 21 मई को मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत से अग्रिम जमानत ली थी। सिंह के वकील राजदीप मजूमदार ने जस्टिस सिन्हा की अदालत के समक्ष दावा किया कि आरोप शरारतपूर्ण हैं और इसके आधार पर कोई मामला दर्ज नहीं किया जा सकता है।