कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की अगली तारीख 12 अगस्त तय की है। अदालत ने केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन को इस मुद्दे पर अपने विचार और प्रस्ताव 12 अगस्त तक व्यक्त करने का निर्देश दिया है।
खंडपीठ में शामिल रहे न्यायाधीश अरिजीत बनर्जी ने कहा कि समाज में महिलाओं और ट्रांसजेंडर लोगों के प्रति समाज के एक वर्ग की मानसिकता को भी बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस मानसिकता को बदलने की शुरुआत स्कूली शिक्षा स्तर से होनी चाहिए।
सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में महिलाओं और ट्रांसजेंडर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने की मांग वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि इस उद्देश्य के लिए राज्य में हर बस में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा सकते हैं।
इसके साथ ही अदालत ने सभी बसों और बस स्टॉप पर हेल्पलाइप नंबरों को प्रदर्शित करने का सुझाव दिया। अदालत ने कहा कि ट्रांसजेंडर लोगों के लिए समर्पित एक खास हेल्पलाइन भी शुरू की जा सकती है। यह कदम इस दिशा में बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।