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Bengal: पुलिस हिरासत में महिला को यातना मामले की होगी CBI जांच, कलकत्ता हाईकोर्ट ने 15 नवंबर तक मांगी रिपोर्ट

Wed, 09 Oct 2024 12:43 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

न्यायमूर्ति राजर्षि भारद्वाज ने सीबीआई को 8 से 11 सितंबर के बीच पुलिस हिरासत में हुई कथित शारीरिक यातना की जांच करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा, 'मामले को सीबीआई को स्थानांतरित करने का निर्णय हिरासत में यातना के गंभीर आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की आवश्यकता पर आधारित है।'
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कलकत्ता हाईकोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान एक महिला की कथित पुलिस हिरासत में यातना की सीबीआई जांच का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि दो याचिकाकर्ताओं ने हिरासत के दौरान पुलिस पर शारीरिक शोषण का आरोप लगाया, जबकि एक जेल अधिकारी की रिपोर्ट ने उनमें से एक पर इस तरह के कृत्य की पुष्टि की। अदालत ने सीबीआई के जांच अधिकारी को 15 नवंबर तक उसके समक्ष रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। इस मामले में हाईकोर्ट 18 नवंबर को फिर सुनवाई करेगा। 

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न्यायमूर्ति राजर्षि भारद्वाज ने सीबीआई को 8 से 11 सितंबर के बीच पुलिस हिरासत में हुई कथित शारीरिक यातना की जांच करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा, 'मामले को सीबीआई को स्थानांतरित करने का निर्णय हिरासत में यातना के गंभीर आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की आवश्यकता पर आधारित है।'

उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों की कथित संलिप्तता के कारण स्थानीय पुलिस द्वारा जांच करने में स्वार्थ का टकराव हो सकता है। इसलिए, सीबीआई को शामिल पुलिस अधिकारियों की पहचान करनी चाहिए और उन्हें कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
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दोनों याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वह डॉक्टर की हत्या के विरोध में शांतिपूर्ण रैलियों में भाग ले रहे थे, जो संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत संरक्षित है। उन्होंने कहा कि आठ सितंबर को पहले याचिकाकर्ता को एक महिला की शिकायत के बाद दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने गिरफ्तार किया था।

अदालत ने आगे कहा कि दूसरे याचिकाकर्ता को 27 अगस्त को 'छात्र समाज' द्वारा आयोजित नबन्ना अभियान रैली में भाग लेने के दौरान गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था, लेकिन 7 सितंबर को उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया।



दोनों याचिकाकर्ताओं को 9 सितंबर को डायमंड हार्बर में जिला और सत्र न्यायाधीश, विशेष अदालत (पॉक्सो अधिनियम के तहत) के समक्ष पेश किया गया। जमानत के उनके अनुरोधों को अस्वीकार कर दिया गया और उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया गया, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इसमें कहा गया कि याचिकाकर्ताओं को 5 अक्तूबर को जमानत दे दी गई थी।

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को उनके खिलाफ विश्वसनीय आरोपों के आधार पर कानूनी रूप से गिरफ्तार और हिरासत में लिया गया था। याचिकाकर्ता, शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के अपने दावों के विपरीत, कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करने वाली गतिविधियों में शामिल थे।

उच्च न्यायालय ने कहा कि डायमंड हार्बर उप-सुधार गृह के अधीक्षक द्वारा प्रस्तुत मेडिकल रिपोर्ट की समीक्षा करने पर, यह स्पष्ट है कि दूसरे याचिकाकर्ता को पुलिस हिरासत में शारीरिक यातना दी गई थी।

आदेश पारित करते हुए, न्यायमूर्ति भारद्वाज ने राज्य को याचिकाकर्ताओं द्वारा दिए गए दावों के विरोध में चार सप्ताह में एक हलफनामा दाखिल करने और याचिकाकर्ताओं को अगले एक सप्ताह में इसका जवाब देने का निर्देश दिया।

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