पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार (फाइल फोटो)
शारदा चिटफंड मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार की गिरफ्तारी पर लगी रोक को हटा दिया है। अब केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) चाहे तो राजीव कुमार को गिरफ्तार कर सकती है। हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि जांच एजेंसी को गिरफ्तारी को न्यायोचित भी ठहराना चाहिए।
आदेश आने के साथ ही सीबीआई की टीम भी सक्रिय हो गई और डिप्टी पुलिस कमिश्नर के दफ्तर पहुंची। इसी जगह पर राजीव कुमार का भी घर है। सीबीआई ने यहां नोटिस चिपकाकर राजीव कुमार को शनिवार को सीबीआई दफ्तर में हाजिर होने को कहा है।
सीबीआई सूत्रों ने कहा कि जांच एजेंसी की आर्थिक अपराध शाखा के अधिकारी कुमार के आधिकारिक आवास पर उनकी हाजिरी दर्ज करने पहुंचे थे। उच्च न्यायालय ने 30 मई 2019 के आदेश के मुताबिक अधिकारी वहां पहुंचे थे और उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया था।
अदालत ने उनकी उस याचिका को भी खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने मामले में पूछताछ के लिये सीबीआई के नोटिस को रद्द करने का अनुरोध किया था।
राजीव कुमार अभी पश्चिम बंगाल सीआईडी में अतिरिक्त महानिदेशक हैं। वह उच्चतम न्यायालय द्वारा 2014 में चिटफंड के दूसरे मामलों के साथ इस मामले को भी सीबीआई को सौंपे जाने से पहले पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल का हिस्सा थे।
शारदा समूह की कंपनियों ने कथित तौर पर लाखों लोगों को उनके निवेश पर भारी मुनाफे का झांसा दे करीब 2500 करोड़ रुपये का चूना लगाया।
उच्चतम न्यायालय ने मई 2014 में सुदीप्त सेन नीत शारदा समूह सहित कई चिटफंड घोटालों की जांच सीबीआई को सौंपी थी। इन घोटालों के जरिए निवेशकों को 2500 करोड़ रुपये का चूना लगाया गया था। राजीव कुमार 2013 में बिधाननगर पुलिस आयुक्त थे जब इस घोटाले का खुलासा हुआ था।