बंगाल में प्रचंड जीत के बाद भाजपा अब प्रशासनिक मोर्चे पर सावधानी बरत रही है। हाईकोर्ट से प्रतिकूल आदेश टालने की यह अपील नई सरकार को शुरुआती चुनौतियों से बचाने और व्यवस्था को समझने के लिए समय देने की एक रणनीतिक कोशिश है। खबर में मामले को विस्तार से जानिए...
पश्चिम बंगाल में पंद्रह साल पुराने तृणमूल कांग्रेस के शासन का अंत हो चुका है। इस बीच भाजपा के कानूनी प्रकोष्ठ से जुड़े वकीलों ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वकीलों ने न्यायाधीशों से मौखिक अपील की है कि नई सरकार के कार्यभार संभालने तक राज्य सरकार के खिलाफ कोई भी प्रतिकूल आदेश पारित न किया जाए।
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अदालत से राहत की मांग
मंगलवार को अधिवक्ता राजदीप मजूमदार, धीरज त्रिवेदी और सुस्मिता साहा दत्ता ने अलग-अलग अदालतों में यह मामला उठाया। उन्होंने जजों से अनुरोध किया कि चूंकि राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया चल रही है, इसलिए प्रशासन को संभालने के लिए कुछ दिनों का समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक नई भाजपा सरकार कामकाज व्यवस्थित नहीं कर लेती, तब तक राज्य के खिलाफ किसी भी तरह के कड़े निर्देश जारी न किए जाएं।
मुख्य न्यायाधीश का रुख
अधिवक्ता सुस्मिता साहा दत्ता ने मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल की अदालत में यह विषय रखा। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने उनकी इस मौखिक प्रार्थना को गंभीरता से लिया है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वह इस पर विचार करेंगे। कानून के जानकारों का मानना है कि सत्ता हस्तांतरण के दौरान प्रशासनिक शून्यता से बचने के लिए यह अपील की गई है।
207 सीटों के साथ भारी बहुमत
गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 294 सदस्यीय सदन में 207 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया है। इस जीत के साथ ही ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी का 15 साल का निर्बाध शासन समाप्त हो गया है। अब सभी की निगाहें नई सरकार के शपथ ग्रहण और प्रशासनिक सुधारों पर टिकी हैं।