कलकत्ता हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा कि क्या उसने पश्चिम बंगाल के श्रमिकों को हिरासत में लिया है। हाईकोर्ट ने दो बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह जानकारी मांगी है।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि उनके रिश्तेदारों को दिल्ली में अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है। याचिकाओं में बंदियों की रिहाई और उन्हें कोर्ट के सामने पेश करने का निर्देश देने की मांग भी की गई है। याचिकाओं में दावा किया गया है कि स्वीटी बीबी, कुर्बान शेख, उनके नाबालिग बेटे, सुनाली खातून, दानिश और उनके नाबालिग पोते को नई दिल्ली में अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने कहा कि बंगाली भाषी लोगों को दिल्ली में इस संदेह पर हिरासत में लिया गया है कि वे बांग्लादेशी नागरिक हैं और अधिकारियों ने उनकी पहचान की भी जांच नहीं की।
इस पर न्यायमूर्ति तपब्रत चक्रवर्ती की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि आरोपों की प्रकृति को देखते हुए, प्रथम दृष्टया हमारा मानना है कि रिट याचिका विचारणीय है और यह अदालत मूकदर्शक नहीं बनी रह सकती। इसके साथ ही अदालत ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह इस बारे में प्रासंगिक दस्तावेज पेश करे कि क्या दोनों को हिरासत में लिया गया था।
साथ ही अदालत ने दिल्ली सरकार को यह भी बताने का निर्देश दिया गया कि क्या यह "हिरासत" किसी अदालत के आदेश के संबंध में थी और इसके पीछे क्या आधार था। अदालत ने दिल्ली प्रशासन से यह भी पूछा गया कि क्या उनकी हिरासत पुलिस अधिकारियों या राज्य के अधिकारियों द्वारा की जा रही किसी जांच से संबंधित थी।
इसे भी पढ़ें- Astra: भारत ने हवा से हवा में मार करने वाली 'अस्त्र' मिसाइल का किया सफल परीक्षण, इन खासियतों से है लैस