कलकत्ता हाईकोर्ट ने एचआईवी से पीड़ित एक उम्रकैद के दोषी को सशर्त जमानत दी, क्योंकि वह लगभग 15 साल से जेल में है और उसकी अपील लंबित है। अदालत ने उसे 10 हजार रुपये के मुचलके और दो जमानतदारों के साथ रिहा करने का निर्देश दिया। साथ ही जिले से बाहर जाने पर पाबंदी और मासिक हाजिरी का आदेश दिया।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने एचआईवी से पीड़ित एक व्यक्ति को सशर्त जमानत दी है। व्यक्ति उम्रकैद की सजा काट रहा था। अदालत ने यह फैसला इस आधार पर लिया कि वह करीब 15 साल से जेल में है और उसकी सजा के खिलाफ दायर अपील अभी तक लंबित है।
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जस्टिस राजशेखर मंथा की अध्यक्षता वाली दो जजों की पीठ ने कहा कि निकट भविष्य में अपील की सुनवाई की संभावना बहुत कम है। इसलिए अदालत ने उसकी सजा को अपील के निपटारे तक के लिए निलंबित कर दिया।
इस पीठ में जस्टिस राय चट्टोपाध्याय भी शामिल थीं। अदालत ने निर्देश दिया कि आरोपी को 10 हजार रुपये के मुचलके और दो जमानतदारों के साथ जमानत पर रिहा किया जाए। इन जमानतदारों में से एक स्थानीय होना जरूरी है।
जेल अधीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी जलपाईगुड़ी सुधार गृह में बंद था और उसने अब तक 14 साल, 11 महीने और 24 दिन जेल में बिताए हैं।
गुरुवार को जारी आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि जेल में आरोपी का आचरण अच्छा रहा है और उसके खिलाफ कोई नकारात्मक रिपोर्ट नहीं मिली है। साथ के कैदियों ने भी बताया कि वह सहयोगी स्वभाव का है और किसी को उससे कोई शिकायत नहीं है।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपी जलपाईगुड़ी जिले के जयगांव थाना क्षेत्र की सीमा से बाहर बिना अनुमति नहीं जाएगा और हर महीने एक बार थाने में हाजिरी देगा, जब तक अदालत से अगला आदेश नहीं आता।
सार्वजनिक अभियोजक ने अदालत को बताया कि आरोपी ने एक महिला के साथ एक कमरा किराए पर लिया था, लेकिन अगले ही दिन वह कमरा छोड़ दिया गया और उस कमरे में महिला का शव मिला था।
जलपाईगुड़ी सत्र न्यायालय ने महिला की हत्या के मामले में आरोपी को दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि अब उसकी अपील पर सुनवाई मार्च महीने में की जाएगी।