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SC: लड़कियों की यौन इच्छा पर कलकत्ता हाईकोर्ट की टिप्पणी का मामला, सुप्रीम कोर्ट 20 अगस्त को सुनाएगा फैसला

Sun, 18 Aug 2024 12:10 AM IST
विशांत श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कलकत्ता हाईकोर्ट की लड़कियों के यौन इच्छाएं नियंत्रण करने की टिप्पणी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट 20 अगस्त को फैसला सुना सकता है। पिछले साल हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में सुनवाई करते हुए आरोपी को भी बरी कर दिया था। 
 
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Supreme court - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ याचिका पर 20 अगस्त को आदेश सुनाएगा। 2023 में यौन उत्पीड़न के एक मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक आरोपी को बरी कर दिया था, साथ ही किशोरियों को यौन इच्छाओं पर नियंत्रण की सलाह देते हुए आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। 

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सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 8 दिसंबर को भी कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले की आलोचना की थी, साथ ही हाईकोर्ट की टिप्पणी को आपत्तिजनक और पूरी तरह से गलत बताया था। 

कलकत्ता हाईकोर्ट की टिप्पणी पर हुआ था विवाद
कलकत्ता हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सलाह दी थी कि लड़कियों को अपनी यौन इच्छाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए और दो मिनट के सुख के फेर में नहीं पड़ना चाहिए। साथ ही हाईकोर्ट ने लड़कों को भी लड़िकयों की इज्जत करने की सलाह दी थी और कहा कि लड़कों को इसके लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।
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जिसके बाद शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों का संज्ञान लिया था और स्वयं एक रिट याचिका शुरू की थी, जिसमें कहा गया था कि न्यायाधीशों से फैसले लिखते समय उपदेश देने की अपेक्षा नहीं की जाती है।

न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ 18 अक्तूबर, 2023 को हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा दी याचिका और स्वत: संज्ञान की याचिका पर भी 20 अगस्त को फैसला सुना सकती है। 

फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची बंगाल सरकार
राज्य सरकार ने भी 18 अक्तूबर 2023 को दिए हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की हुई है।  सरकार की तरफ से कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ वकील हुजैफा अहमदी ने बताया कि उनकी याचिका पर गुरुवार को एक अन्य पीठ सुनवाई करने वाली थी लेकिन पीठ नहीं बैठी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होनी चाहिए।  

सुप्रीम कोर्ट ने की थी आलोचना
इस फैसले की आलोचना करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 8 दिसंबर 2023 को कहा था कि जजों से उम्मीद की जाती है कि वह अपने निजी विचारों को साझा ना करें या भाषण ना दें। यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत किशोरों के अधिकारों का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से हाईकोर्ट के फैसले पर राज्य सरकार से जवाब मांगा था। जिस पर अब राज्य सरकार ने बताया कि उन्होंने भी फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की हुई है।

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