ब्रिटिश कंपनी केयर्न एनर्जी पीएलसी ने अमेरिकी अदालत में एक मुकदमा दाखिल किया है ताकि वह एयर इंडिया की विदेशी संपत्तियों को जब्त कर सके। केयर्न एनर्जी ने यह कदम भारत सरकार से 1.72 अरब डॉलर (करीब 12,600 करोड़ रुपये) के मुआवजे की वसूली के लिए उठाया है।
यह मुआवजा भारत सरकार की तरफ से केयर्न एनर्जी पर पुरानी तारीखों से लागू 10,427 करोड़ रुपये के कर की मांग के खिलाफ कंपनी की अपील पर एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने तय किया था।
इस सारे मामले से जुड़े तीन सूत्रों के मुताबिक, केयर्न एनर्जी ने 14 मई को न्यूयॉर्क के दक्षिण जिले की यूएस जिला अदालत में मुकदमा दाखिल किया था। केयर्न ने अदालत से कहा है कि एयर इंडिया पर भारत सरकार के नियंत्रण और सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी है। कंपनी का कहना है कि भारत सरकार पर उसकी बकाया राशि इस कंपनी से वसूली जानी चाहिए।
सूत्रों का कहना है कि सरकार केयर्न एनर्जी के इस कदम को चुनौती देगी। सरकार का कहना है कि उसने न्यायाधिकरण के फैसले को हेग में अंतरराष्ट्रीय अदालत में चुनौती दे रखी है और उसे यकीन है कि यह फैसला खारिज कर दिया जाएगा।
सूत्रों ने यह भी कहा कि सरकार अपनी कानूनी टीम के साथ भी संपर्क में है, जो किसी भी तरह की कार्रवाई को चुनौती देने के लिए तैयारी कर रही है। हालांकि अभी तक सरकार या किसी अन्य सरकारी कंपनी को केयर्न एनर्जी की तरफ से कोई नोटिस नहीं मिला है। लेकिन केयर्न से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कंपनी ने शुक्रवार को मुकदमा दाखिल किया है। ऐसे में नोटिस जारी होने में कुछ समय लगेगा।
बांकेक गाइडलाइंस के तहत है केयर्न का दावा
केयर्न एनर्जी न्यायाधिकरण के फैसले को लागू कराने के लिए भारत सरकार पर बांकेक गाइडलाइंस के तहत अदालत में सरकारी स्वामित्व वाले प्रतिष्ठानों को विकल्प घोषित करने का दावा कर रही है। बांकेक गाइडलाइंस समझौता एक विदेशी सरकार को उसकी एजेंसियों के खिलाफ आए निर्णय को लागू करने के लिए बाध्य करता है।
कई देशों में मुकदमे दाखिल कर चुकी है केयर्न
केयर्न 21 दिसंबर के अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण के फैसले को लेकर भारत के खिलाफ अमेरिका, ब्रिटेन, नीदरलैंड, कनाडा, फ्रांस, सिंगापुर और तीन अन्य देशों की अदालतों में पहले ही मुकदमा दायर कर चुकी है।
इसके बाद भारत सरकार ने सरकारी बैंकों, तेल व गैस कंपनियों, शिपिंग कंपनियों, और विमानन कंपनी को अपनी विदेशी संपत्त्तियों को जब्त करने की कोशिश के खिलाफ सचेत रहने का निर्देश दिया था। साथ ही बैंकों को अपने विदेशी खातों में ज्यादा पैसे नहीं छोड़ने को भी कहा गया था। सरकार का कहना था कि बैंकों का पैसा सरकारी नहीं बल्कि जनता का होता है, इसलिए केयर्न उसे जब्त नहीं कर सकती।
क्या है पूरा मामला
केयर्न ने 1994 में भारत के तेल व गैस क्षेत्र में निवेश किया था। एक दशक बाद कंपनी ने राजस्थान में बड़ा तेल भंडार खोजा था। साल 2006 में कंपनी ने अपनी भारतीय संपत्तियों को बीएसई में सूचीबद्ध कराया था। पांच साल बाद सरकार ने एक रेट्रोएक्टिव टैक्स कानून (पिछली तारीख से लागू कर का कानून) पारित किया था और इसके आधार पर केयर्न से अपने पुनर्गठन के लिए 10,247 करोड़ रुपये का कर मय ब्याज और जुर्माना अदा करने को कहा था।
केयर्न ने इस कार्रवाई को हेग स्थित मध्यस्थता न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसने पिछले दिसंबर में भारत सरकार के फैसले को खारिज करते हुए केयर्न को 1.2 अरब डॉलर (करीब 8,800 करोड़ रुपये) का मुआवजा मुकदमे की लागत व ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया था, जो कुल 1.72 अरब डॉलर (करीब 12,600 करोड़ रुपये) बैठता है।