ब्रिटिश के एडिनबर्ग स्थित केयर्न एनर्जी की भारत इकाई ने भारत सरकार से 5.6 बिलियन डॉलर के मुआवजे की मांग की है। केयर्न एनर्जी खनन कंपनी है। कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ निर्णय समिति समक्ष अपने 160 पन्ने के 'दावे के बयान' के हवाले से मांग की है कि भारत सरकार द्वारा उसके खिलाफ जारी की गई टैक्स की नोटिस वापस ले। साथ ही कंपनी की ओर से यह आरोप भी लगाया गया है कि भारत सरकार ब्रिटेन के साथ हुई निवेश संधि के तहत अपने दायित्वों का निभाने में विफल रहा है और उसे देश में उचित और न्यायसंगत उपचार नहीं मिला।
आपको बताते चले कि आय कर विभाग ने कंपनी से 29,407 करोड़ रुपए टैक्स की मांग की है। 10 साल से यह टैक्स का मामला चल रहा है। वहीं कंपनी का कहना है कि यह मामला उसके आंतरिक पुनर्गठन का मामला है।
कंपनी की ओर से कहा गया है कि आयकर विभाग जनवरी 2014 में जारी किए गए नोटिस के चलते केन इंडिया में उसकी 9.8 हिस्सेदारी का मूल्य कम हो गया और उसे नुकसान भी हुअा। जिसके खिलाफ कंपनी ने 1.05 अरब डॉलर का मुआवजा मांगा है।
बता दें कि केन इंडिया पहले केन एनर्जी के अंतर्गत थी लेकिन अब यह कंपनी वेदांता समूह के पास है। कंपनी का कहना है कि यदि समिति भारत के पक्ष में देती है तो भारत को भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय निवेश संरक्षण संधि के उल्लंघन के चलते कंपनी को उसके बाकी बचे हुए शेयरों के मूल्य में हुई गिरावट से नुकसान, उस पर ब्याज और जुर्माने के रूप में कुल 5.587 अरब डॉलर ( 37,400 करोड़ रुपए ) का मुआवजा दे।
इस मामले में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ निर्णय समिति ने मामले की सुनाई मई में शुरू कर दी है। इस मामले में भारत अपना जवाब 'बचाव का बयान' नवंबर में दायर करेगा। कंपनी की ओर से दावे का बयान बीते माह आखिर में दाखिल किया गया। इस मामले की साक्ष्य आधारित सुनवाई 2017 के शुरूआत में होने की संभावना है।