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CAG रिपोर्ट में खुलासा- जंग हुई तो लगातार 10 दिन भी नहीं लड़ पाएगी भारतीय सेना

Sat, 22 Jul 2017 09:37 AM IST
amarujala.com- presented by: अरविंद कुमार
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चीन और पाकिस्तान से चल रही तनातनी के बीच नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने संसद में एक रिपोर्ट पेश की है जिसमें भारतीय सेना के पास अपर्याप्त गोला-बारूद होने की बात बताई गई है। सीएजी ने शुक्रवार को पेश की गई अपनी रिपोर्ट में साफ बताया है कि पड़ोसी मुल्कों से जंग की स्थिति में भारत के पास 10 दिन लगातर लड़ने के लिए नाकाफी आर्मामेंट हैं। बता दें कि सीएजी सरकारी खातों का लेखा-जोखा रखने का काम संभालती है।  
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भारतीय सेना की ये कमजोरी दुश्मनों के हौसलें बढ़ा सकती है। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय सेना के पुराने आर्मोमेंट रिकॉर्ड को बताते हुए उसकी बड़ी कमजोरी को पेश किया। दरअसल, सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक आर्मी हेडक्वॉर्टर ने 2009 से 2013 के बीच खरीदारी के जिन मामलों की शुरुआत की, उनमें अधिकतर जनवरी 2017 तक पेंडिंग थे।

2013 से ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड की ओर से सप्लाई किए जाने वाले गोला-बारूद की गुणवत्ता और मात्रा में कमी पर जोर दिया, लेकिन बेहद सोचनीय स्थिति ये है कि इतनी बड़ी लापरवाही पर सेना का कोई ध्यान नहीं गया। वहीं, पॉड्क्शन टारगेट में भी कोई खास तरक्की देखने को नहीं मिली। 
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किसी काम ना आने वाले या रद्द किए हुए गोला-बारूद को लेकर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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इतना ही नहीं सेना के आर्मामेंट डिपो में एक बड़ी लापरवाही ये भी देखने को मिली है कि डिपो में अग्निशमनकर्मियों की भारी कमी है क्योंकि यहां किसी भी वक्त बड़े हादसे होने का खतरा बना रहता है।  रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर डाला गया है कि इस साल जनवरी में सेना के आर्मोमेंट प्रबंधन का पूरा फॉलोअप एडिट किया गया।

बताया  गया है कि ऑपरेशन की अवधि की जरूरतों के हिसाब से सेना में वॉर वेस्टेज रिजर्व रखा जाता है। बता दें कि रक्षा मंत्रालय की तरफ से इसे 40 दिन की मंजूरी मिली थी। वहीं, सेना ने 1999 में यह तय किया की ये अवधि सिर्फ 20 दिन की ही हो। लेकिन सितंबर 2016 की रिपोर्ट से सामने आया है कि केवल 20 फीसदी गोला-बारूद ही 40 दिन के मानक पर फिट बैठे।

वहीं, 55 प्रतिशत आर्मामेंट 20 दिन के न्यूनतम स्तर से भी कम आंके गए। माना कि इसमें प्रगति देखी गई लेकिन एक फायर पावर को मजबूत बनाए रखने के लिए  बख्तरबंद वाहन और उच्च क्षमता वाले गोला-बारूद जरूरत से कम रहे। 

रिपोर्ट में आगे बताया गया कि रक्षा मंत्रालय ने 2013 में रोडमैप को मंजूरी दी थी जिसमें इस बात पर फैसला हुआ कि 2019 तक पूरी तरह से फिट कर दिया जाए।  2013 में जहां 10 दिन की अवधि के लिए 170 के मुकाबले 85 गोला-बारूद ही (50 फीसदी) उपलब्ध थे, अब भी यह 152 के मुकाबले 61 (40 फीसदी) ही उपलब्ध हैं। 
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