पिछले 16 साल से जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए कभी हां तो कभी ना का दौर चल रहा है। पिछले दिनों प्रदेश के सीएम आदित्यनाथ योगी द्वारा प्रोजेक्ट को हरी झंडी देते ही लगने लगा था कि अब तो हवाई अड्डा बन ही जाएगा, लेकिन मंगलवार को केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री पी अशोक गजपति राजू ने कहा कि एनसीआर में दूसरा हवाई अड्डा तो बनेगा, लेकिन यह जेवर में ही बनेगा, अभी तय नहीं हुआ है।
मंत्री ने यहां तक कह दिया कि जेवर हवाईअड्डा एक विचार है। हालांकि, उड्डयन निदेशालय के निर्देश पर यमुना प्राधिकरण जेवर के आसपास की जमीन का सर्वे राइट्स संस्था से करा रहा है और इसकी रिपोर्ट 15 जून को आनी है।
दरअसल, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री पी अशोक गजपति राजू ने दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान एक सवाल के जवाब में बताया कि जेवर में हवाईअड्डा बनाना एक विचार है। दिल्ली के हवाईअड्डे पर भीड़भाड़ है और इसे दूर करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दूसरा हवाईअड्डा बनाने का विचार है।
यह हवाईअड्डा उत्तर प्रदेश के जेवर में बनेगा या हरियाणा के किसी स्थान पर, अभी इस बारे में कुछ तय नहीं हुआ है। यह पूछे जाने पर कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा जेवर हवाईअड्डे के बारे में कोई चिट्ठी-पत्री आई है, तो उन्होंने इसे टाल दिया। हंसते हुए उन्होंने कहा कि यह सवाल उन्हीं से पूछिए।
हां और ना की उलझन में है जेवर इंटरनेशनल हवाई अड्डा
जेवर हवाई अड्डा
जेवर हवाईअड्डे का प्रस्ताव 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने बनाया था। इसके बाद मायावती की 2007 में सरकार बनी तो उन्होंने सर्वे से लेकर 35 गांव की जमीन भी प्रोजेक्ट के लिए छोड़ दी थी। उस वक्त भी केंद्र की सरकार ने हवाई सर्वे से अलावा भौतिक सर्वे भी करा लिया था, लेकिन जब प्रदेश में 2012 में अखिलेश यादव की अगुवाई में प्रदेश में सरकार बनी तो उन्होंने शुरू में यह कह दिया कि प्रदेश सरकार की इस तरह की कोई योजना ही नहीं है।
हालांकि, जिले के सांसद व पूर्व उड्डयन राज्य मंत्री रहे डॉ. महेश शर्मा ने सीएम से मिलकर जेवर एयरपोर्ट के लिए हामी भरवा ली थी और एक प्रस्ताव केंद्र को भी भिजवा दिया था। इसके बाद 2017 में जैसे ही भाजपा सत्ता में आई तो सीएम की तरह से जेवर में एयरपोर्ट बनाने की बात कही गई।
सीएम ने यमुना प्राधिकरण को आवश्यक निर्देश भी दिए कि प्रोजेक्ट के लिए उचित कार्यवाही की जाए। यमुना प्राधिकरण ने उड्डयन निदेशालय को पत्र लिखा तो निदेशालय ने कहा कि नए सिरे से सर्वे जरूरी है। मौजूदा समय में राइट्स संस्था सर्वे कर रही है, जिसकी रिपोर्ट 15 जून को मिलेगी।
जेवर के अलावा दूसरा स्थान नहीं
एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए शुरू से ही प्रयास जारी हैं। प्रोजेक्ट के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी से भी मंजूरी मिल चुकी है। जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए केंद्र सरकार व प्रदेश सरकार काफी काम चुकी है। दिल्ली-एनसीआर में जेवर के अलावा कोई दूसरा स्थान ऐसा नहीं है, जहां पर एयरपोर्ट बनाया जा सके।
-डॉ. महेश शर्मा, केंद्रीय मंत्री
पिछले 16 साल से कुछ ऐसे बन रहा है जेवर हवाई अड्डा!
जेवर हवाई अड्डा
जेवर एयरपोर्ट: एक नजर
- 2001 में प्रदेश की भाजपा सरकार ने प्रस्ताव तैयार किया।
- 2003 में जेवर में प्रोजेक्ट के लिए जगह निर्धारित की गई।
- 2007 में बसपा सरकार ने यमुना प्राधिकरण के 35 गांवों की करीब 2471 एकड़ जमीन रिजर्व कर मास्टर प्लान तैयार किया।
- 2010 टीरामबोल के नेतृत्व में एक टीम गठित, करीब 5000 करोड़ खर्च का अनुमान। 74 फीसदी निजी और शेष खर्च सरकार का।
- 2011 उड्डयन विभाग, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, दिल्ली एयरपोर्ट से दूरी 72 या 120 किलोमीटर के विवाद सुलझाकर 90 किलोमीटर तय कर दी गई।
- 2012 में सपा सरकार बनते ही प्रोजेक्ट को निरस्त कर दिया गया।
- 2013 में आगरा कुशीनगर में एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया।
- 2014 में रक्षा मंत्रालय ने प्रस्ताव को नकार दिया।
- 26 मई 2015 को प्रदेश सरकार ने आगरा व हिरनगांव में एयरपोर्ट बनाने को पत्र भेजा।
- 27जून 2015 उड्डयन विभाग, पवन हंस, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, एयर इंडिया समेत अन्य विभाग के अधिकारियों ने एनसीआर में दूसरा एयरपोर्ट को लेकर गहन चर्चा की थी। जिसमें जेवर ही उपयुक्त जगह माना।
- 7 जुलाई 2015 को सैफई, बाह तहसील की भदरौली व जेवर में एयरपोर्ट बनाने के लिए सीएम ने पीएम को पत्र लिखा।
- 30 जून 2016 को रक्षा मंत्रालय की तरफ से मिली एनओसी।
- 6 अप्रैल 2017 को प्रदेश के सीएम आदित्यानाथ योगी ने प्रोजेक्ट पूरा करने का दिया मौखिक आदेश