प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को दिवाला कानून में सात सुधारों को मंजूरी दे दी। इसके अलावा कैबिनेट ने कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले लिए। विशेषज्ञों का कहना है कि दिवाला कानून में बदलाव से कई अवरोधों को दूर करने में मदद मिलेगी। इसके तहत मुकदमेबाजी व अन्य न्यायिक प्रक्रिया सहित कॉरपोरेट दिवाला संकल्प प्रक्रिया को 330 दिनों के अंदर पूरा करना होगा। अभी यह समयसीमा 270 दिन है, लेकिन कई मामलों में यह लंबा खिंच जाता है।
बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि दिवाला कानून संहिता (आईबीसी) में अब तक दो बार संशोधन हो चुके हैं। कानून में बदलाव के अनुसार संकल्प योजना केंद्र, राज्य या स्थानीय प्रशासन सहित सभी हितधारकों के लिए बाध्यकारी होगी। दिवाला कानून में संशोधन का उद्देश्य समयसीमा का कड़ाई से पालन और कंपनी के कर्ज चुकाने में अक्षमता की गंभीर खामी को दूर करने के साथ समाधान प्रक्रिया के जरिये अधिकतम मूल्य प्राप्त करना है।
अरुणाचल में सबसे बड़ी हाइड्रो परियोजना को मंजूरी
कैबिनेट ने एक अन्य फैसले में देश के सबसे बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट दिबांग मल्टीपर्पस को अनुमति दे दी। यह 2880 मेगावॉट का प्रोजेक्ट है।