केंद्र सरकार ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 750 बेड वाले अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) स्थापित करने की मंजूरी दे दी है। इस कदम का लक्ष्य राज्य के लोगों को सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना और बड़ी संख्या में डॉक्टरों को जुटाना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) के तहत एम्स स्थापित करने की अनुमति दी है। इसकी अनुमानित लागत 1,011 करोड़ रुपये है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, ‘नया एम्स स्थापित होने से लोगों को सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके अलावा, डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचरियों का एक समूह बनेगा जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बनाए गए प्राथमिक और द्वितीयक स्तर की सुविधाओं के लिए उपलब्ध रहेंगे। इस प्रकार, इससे दो उद्देश्य एक साथ पूरे होंगे।
यह संस्थान मौजूदा क्षेत्रीय बीमारियों और स्वास्थ्य के अन्य मसलों पर शोध भी करेगा और ऐसी बीमारियों के लिए बेहतर नियंत्रण और इलाज उपलब्ध कराएगा।’ गोरखपुर में स्थापित किए जाने वाले 750 बेड की क्षमता वाले एम्स में आपातकालीन या ट्रॉमा और आयुष विभाग भी होंगे।
बेनामी लेनदेन, ट्रांसजेंडर विधेयक और ईवीएम की खरीद को भी मंजूरी
इसके अलावा, कैबिनेट ने चुनाव आयोग को नए ईवीएम की खरीददारी के लिए 9,200 करोड़ रुपये की मंजूरी दी। चुनाव आयोग ने 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले लगभग 14 लाख नए ईवीएम खरीदने का प्रस्ताव किया था।
कैबिनेट ने बेनामी लेनदेन (निषेध) (संशोधन) बिल, 2015 में संशोधन को संसद में पेश करने को मंजूरी दे दी। इस संशोधन का उद्देश्य कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के नजरिए से विधेयक को मजबूती देना है जिससे वैसी व्यावहारिक दिक्कतों का समाधान किया जा सके जिनके विधेयक के कानून बनने के बाद सामने आने की संभावना हो।
कैबिनेट ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों की सुरक्षा) विधेयक 2016 को भी मंजूरी दे दी है। इस विधेयक के जरिए सरकार ऐसे व्यक्ति के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिए एक प्रणाली विकसित की है। इस विधेयक से बड़ी संख्या में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को लाभ होगा।