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देश में बनेंगे 7,000 मेगावाट के परमाणु बिजली संयंत्र

Thu, 18 May 2017 04:32 AM IST
amarujala.com- Presented by: संदीप भट्ट
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सरकार ने पूर्ण रूप से स्वदेशी आधार पर निर्मित 7,000 मेगावाट के परमाणु बिजली संयंत्र स्थापित करने का फैसला किया है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी की बैठक में 10 प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर्स वाले परमाणु संयंत्र लगाने के फैसले पर मुहर लगा दी गई। फैसले के मुताबिक 700 मेगावाट क्षमता वाली 10 यूनिटों की स्थापना की जाएगी, जिसके तहत 70,000 करोड़ रुपये के मैन्यूफैक्चरिंग के ऑर्डर निकलेंगे। 
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कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए बिजली, कोयला, नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि 7,000 मेगावाट के परमाणु बिजली संयंत्र की स्थापना से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तरीके से 33,400 लोगों को रोजगार मिलेंगे।

फिलहाल देश में परमाणु बिजली संयंत्र की उत्पादन क्षमता 6,780 मेगावाट की है और परमाणु बिजली के 22 संयंत्र चल रहे हैं। हालांकि प्रस्तावित 7,000 मेगावाट के बिजली संयंत्रों की स्थापना के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है।  
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सस्ती बिजली मुहैया कराएगी नई कोल लिंकेज नीति
आम लोगों को सस्ती दरों पर बिजली मुहैया कराने के उद्देश्य से बुधवार को कैबिनेट कमेटी ने नई कोल लिंकेज नीति को मंजूरी दे दी। नई नीति के तहत फ्यूल सप्लाई एग्रीमेंट (एफएसए) से वंचित 28,000 मेगावाट के बिजली संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार इन संयंत्रों के साथ एफएसए करेगी।

ये वैसे बिजली संयंत्र हैं, जिनके पास एफएसए के लिए सरकार की तरफ से जारी लेटर ऑफ एश्योरेंस (एलओए) तो है लेकिन कोयले की कमी की वजह से इनके साथ एफएसए ने नहीं किया गया था। अब कोल इंडिया लिमिटेड इनके साथ एफएसए करेगी। इनमें से अधिकतर संयंत्र वर्ष 2021-22 तक तैयार हो जाएंगे।
 
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पीपीए वाले बिजली संयंत्रों के लिए होगी एफएसए की नीलामी

पीयूष गोयल ने बताया कि नई कोल लिंकेज नीति को शक्ति का नाम दिया गया है। नीति तैयार करने के दौरान सरकार ने यह भी ध्यान रखा है कि कोयला लिंकेज का फायदा कंपनियों के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भी मिले।

गोयल ने बताया कि जिन बिजली संयंत्रों के पास बिजली वितरण कंपनियों के साथ बिजली खरीद समझौता (पीपीए) है लेकिन एफएसए नहीं है, उनके लिए एफएसए की नीलामी की जाएगी। नीलामी में हिस्सा लेने के दौरान इन कंपनियों को यह बताना होगा कि वह बिजली की बिक्री के दौरान कीमत में कितनी छूट देंगे और उसी आधार पर इन्हें लिंकेज दिए जाएंगे।

बिजली बनाने वाली जिन कंपनियों के पास पीपीए भी नहीं है, वे प्रीमियम कीमत चुका कर लिंकेज हासिल कर सकती हैं। नई नीति के तहत केंद्र सरकार राज्यों को भी निश्चित कीमत पर कोयले की आपूर्ति करेगी और राज्य सरकारें उस कोयले को आगे बिजली बनाने वाली कंपनियों को बिजली की दरों के मुताबिक निश्चित कीमत पर बेच सकती हैं।
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