कट्टरवादी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी जांच पूरी करते हुए रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कुछ राज्य सरकारों और अन्य जांच एजेंसियों से भी पीएफआई को लेकर इनपुट मांगा है।
पीएफआई पर नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर देश में हुई हिंसा के लिए फंडिंग मुहैया कराने के अलावा कई अन्य देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने का आरोप है। अधिकारियों ने कहा कि पीएफआई को लेकर ईडी की तरफ से दी गई रिपोर्ट का परीक्षण किया जा रहा है।
इसके अलावा राज्यों व अन्य एजेंसियों से भी यह पूछा गया है कि क्या उनके यहां सीएए विरोधी गतिविधियों में पीएफआई की संलिप्तता मिली है या नहीं। बता दें कि पीएफआई देश में सीएए के खिलाफ हुए प्रदर्शनों से अपना कोई संबंध होने से कई बार इनकार कर चुका है।
माना जा रहा है कि संगठन व एक अन्य एनजीओ रिहेब इंडिया फाउंडेशन (आरएफआई) के खिलाफ मनी लान्ड्रिंग को लेकर चल रही दूसरी जांच के दौरान पीएफआई के कुछ पदाधिकारियों से की गई पूछताछ के आधार पर ईडी ने अपनी रिपोर्ट तैयार की है।
ईडी ने केरल स्थित पीएफआई के दर्जन भर पदाधिकारियों से इसी महीने की शुरुआत में संगठन के वित्त, खर्च, फंडिंग हासिल करने के रास्तों और उसकी तरफ से जुटाए गए या बांटे गए फंड से लाभान्वित होने वाले लोगों को लेकर पूछताछ की थी। इन सभी के बयान पीएमएलए (मनी लान्ड्रिंग निरोधक कानून) के तहत दर्ज किए गए थे।
दो साल से मनी लान्ड्रिंग की चल रही जांच
ईडी ने 2016 में पीएफआई और आरएफआई के खिलाफ मामला दर्ज करते हुए मनी लान्ड्रिंग के आरोपों की जांच शुरू की थी। यह जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की तरफ से इन दोनों संगठनों के खिलाफ दर्ज एफआईआर व चार्जशीट के आधार पर शुरू की गई थी। ईडी ने इसी मामले के साथ सीएए विरोधी हिंसक प्रदर्शनों को शह देने के लिए विभिन्न बैंक खातों में धन भेजने की जांच भी शुरू की थी।
सीएए के समय 120 करोड़ रुपये बांटने का है आरोप
सूत्रों का कहना है कि पीएफआई पर सीएए विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के दौरान 120 करोड़ रुपये बांटने का आरोप है। सूत्रों ने बताया कि पीएफआई, आरएफआई व कुछ अन्य के बैंक खातों में समय-समय पर जमा कराई गई कुल 120 करोड़ रुपये की यह रकम ईडी के स्कैनर पर है और इसकी जांच जारी है।