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नागरिकता कानून पर एनडीए में बढ़ी 'रार', जेडीयू-लोजपा के बाद अब अकाली दल ने भी उठाया सवाल

Sun, 22 Dec 2019 10:16 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुखबीर सिंह बादल-नीतीश कुमार-चिराग पासवान - फोटो : ANI
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नागरिकता संशोधन कानून को लेकर देश के कई राज्यों में जारी बवाल के बीच भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए में भी रार बढ़ती दिखाई दे रही है। अब भाजपा की सहयोगी शिरोमणि अकाली दल ने इस कानून को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने इसमें मुसलमानों को शामिल किए जाने की मांग भी की है।

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शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए मुसलमानों को इस कानून में अलग नहीं करना चाहिए। बता दें कि अकाली दल भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का एक हिस्सा है। पार्टी ने संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन किया था लेकिन मुस्लिम समुदाय के बहिष्कार पर सवाल भी उठाया था। 



एनडीए के अन्य सहयोगी नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड के अलावा रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी ने भी कानून को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। एक तरफ जहां बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साफ किया है कि बिहार में एनआरसी लागू नहीं होगा वहीं लोजपा ने कहा कि केंद्र सरकार कानून को लेकर फैले भ्रम को दूर करने में विफल रही है।
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जेडीयू की मांग- एनआरसी को लेकर सरकार बुलाए एनडीए की बैठक
जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा कि एनआरसी के खिलाफ एनडीए के कई घटक दलों ने अपने विचार व्यक्त किए हैं। अगर इस मुद्दे पर एनडीए की बैठक बुलाई जाती है, तो जेडीयू इसका स्वागत करेगी। इस पर बैठक बहुत जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि इसे राज्य में लागू नहीं किया जाएगा। हम एनआरसी के खिलाफ हैं।

नीतीश कुमार बोले- बिहार में एनआरसी लागू नहीं होगा

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को कहा कि प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) राज्य में लागू नहीं होगा। इसके बाद इस विवादास्पद फैसले का विरोध करने वाले वह सत्तारूढ़ राजग के पहले प्रमुख सहयोगी बन गये हैं। कई गैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री पहले ही इसका विरोध कर रहे हैं। जेडीयू नेता ने एनआरसी लागू करने के खिलाफ आवाज उठाई तो केंद्र सरकार ने भी इस व्यापक कवायद को लेकर आशंकाओं को खारिज करने का प्रयास किया। एक दिन पहले ही नीतीश ने गया में एक जनसभा में साफ किया था कि वह गारंटी देते हैं कि उनके सामने अल्पसंख्यकों के साथ अनुचित बर्ताव नहीं किया जाएगा।

सरकार कानून को लेकर फैले भ्रम को दूर करने में विफल रही: लोजपा
लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) ने शुक्रवार को कहा कि संशोधित नागरिकता कानून और प्रस्तावित एनआरसी को जोड़कर हो रहे प्रदर्शनों से साफ है कि सरकार देश के अहम वर्ग में फैले भ्रम को दूर करने में विफल रही है। संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन करने वाली लोजपा के अध्यक्ष चिराग पासवान ने ट्वीट किया कि लोकसभा और राज्यसभा में बिल पास हो जाने के बाद भी देश में इस बिल को लेकर असंतोष बरकरार है।

उन्होंने कहा कि लोक जनशक्ति पार्टी ये विश्वास दिलाती है कि एनआरसी को लेकर मुसलमान, दलित और वंचित वर्ग के लोगों की जो चिंताए हैं, उसका पूरा ध्यान रखा जाएगा। लोक जनशक्ति पार्टी किसी ऐसे विधेयक का समर्थन नहीं करेगी जो आम लोगों के हित में न हो।संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझाने की जिम्मेदारी भी सरकार की है। लोक जनशक्ति पार्टी आग्रह करती है कि प्रदर्शनकारियों से संवाद कर उनकी चिंताओ को दूर करे।
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कई अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री भी जता चुके हैं विरोध

कुछ दिन पहले ही कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के अलावा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी एनआरसी का विरोध कर चुके हैं। गृह मंत्रालय के एक आला अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि जिस किसी का जन्म भारत में एक जुलाई, 1987 से पहले हुआ हो या जिनके माता-पिता का जन्म उस तारीख से पहले हुआ हो, वे कानून के अनुसार भारत के वास्तविक नागरिक हैं और उन्हें नागरिकता संशोधन अधिनियम या संभावित एनआरसी से चिंता करने की जरूरत नहीं है।
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