सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनातनी एक बार फिर सुर्खियों में है। गुरुवार को जलशक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान द्वारा बार-बार पत्र लिखना केवल एक औपचारिकता है और इससे भारत की नीति में कोई बदलाव नहीं होने वाला।
जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि सिंधु जल संधि के निलंबन को रद्द करने के लिए पाकिस्तान का पत्र लिखना एक औपचारिकता भर है। इससे इस मामले में भारत का रुख नहीं बदलने वाला है। पाकिस्तान ने भारत को कई बार पत्र लिखकर संधि पर अपने फैसले की समीक्षा करने को कहा है।
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पाटिल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, सिंधु जल संधि के तहत पानी कहीं नहीं जाएगा। संधि पर पाकिस्तानी नेता बिलावल भुट्टो की टिप्पणियों के सवाल पर पाटिल ने कहा कि भुट्टो ने राजनीति के लिए कई बातें कही हैं। पाकिस्तानी नेता ने हाल ही में सिंधु जल संधि को निलंबित करने पर भारत को धमकी दी थी।
पाटिल ने कहा, उन्होंने खून और पानी बहने की भी बात की, लेकिन हम ऐसी खोखली धमकियों से नहीं डरते। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया गया था।
जल जीवन मिशन की 119 में से 89 सर्वेक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत
वहीं दूसरी ओर जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने बुधवार को कहा कि राज्यों में जल जीवन मिशन (जेजेएम) के कार्यान्वयन का आकलन करने के लिए प्रतिनियुक्त 119 केंद्रीय टीमों में से 89 ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। शेष इस महीने के अंत तक आ जाएंगी। पाटिल ने कहा, जल जीवन मिशन योजनाओं का जमीनी निरीक्षण करने के लिए डीआरडीओ और हमारे मंत्रालय के
अधिकारियों के समन्वय में 119 टीमों का गठन किया गया था। इनमें से 111 टीमों ने अपना सर्वेक्षण कार्य पूरा कर लिया है। लगभग 89 ने अपनी रिपोर्ट पहले ही सौंप दी हैं। उम्मीद है शेष 30 जून तक अपनी रिपोर्ट दे देंगे।
उन्होंने कहा, केंद्र की प्रमुख योजना जल जीवन मिशन का उद्देश्य भारत के हर ग्रामीण परिवार को व्यक्तिगत घरेलू नल कनेक्शन के जरिये सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है। हमने स्पष्ट कर दिया है कि ठेकेदार या अन्य व्यक्ति गलती करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।