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Report: 2025 की पहली छमाही में मेघालय का बर्नीहाट भारत का सबसे प्रदूषित शहर, इस शहर को मिला सबसे साफ का दर्जा

Fri, 11 Jul 2025 07:46 PM IST
रिया दुबे न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सीआरईए के विश्लेषण के अनुसार 2025 की पहली छमाही में बर्नीहाट भारत का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जबकि दिल्ली दूसरे स्थान पर रहा। वहीं मिजोरम का आइजोल देश का सबसे स्वच्छ शहर रहा। आइए जानते हैं कि देश के टॉप प्रदूषित शहर कौन से हैं। 
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मिजोरम का आइजोल देश का सबसे स्वच्छ शहर - फोटो : amar ujala digtal
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विस्तार
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असम-मेघालय सीमा पर स्थित बर्नीहाट 2025 की पहली छमाही में भारत का सबसे प्रदूषित शहर। वहीं मिजोरम का आइजोल देश का सबसे स्वच्छ शहर रहा। स्वतंत्र अनुसंधान संगठन सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) के विश्लेषण में यह दावा किया गया है।

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दिल्ली ने प्रदूषण के मामले में प्राप्त किया दूसरा स्थान 

प्रदूषण के मामले में राजधानी दिल्ली दूसरे स्थान पर रहा। विश्लेषण के अनुसार बर्नीहाट में पीएम 2.5 की औसत सांद्रता 133 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई। वहीं, दिल्ली में यह स्तर 87 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा, जो कि राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक से करीब दो गुना ज्यादा है।

टॉप 10 प्रदूषित शहरों की सूची

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हाजीपुर (बिहार), गाजियाबाद, गुरुग्राम, सासाराम (बिहार), पटना, तालचेर (ओडिशा), राउरकेला (ओडिशा) और राजगीर (बिहार) शीर्ष 10 सबसे प्रदूषित सूची में अन्य शहर थे।

239 शहरों में से 122 शहरों में वायु गुणवक्ता खराब रही 

सीआरईए ने कहा कि जनवरी से जून तक, सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों (सीएएक्यूएमएस) के साथ 293 शहरों में से 239 में 80 प्रतिशत से अधिक दिनों के लिए कण पदार्थ डेटा उपलब्ध था। 239 शहरों में से 122 शहरों में वायु गुणवत्ता वार्षिक राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक (NAAQS) 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक रही, जबकि 117 शहर वार्षिक सीमा से नीचे रहे।

दिल्ली में दूसरे प्रदूषण स्त्रोंतो को किया नजरअंदाज

सीआरईए ने कहा कि दिल्ली में वाहनों पर जीवन-पर्यन्त प्रतिबन्ध जैसे प्रतिबंध लागू करना वायु गुणवत्ता प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण घटक है। लेकिन इसमें केवल वाहनों से होने वाले उत्सर्जन के जोखिमों पर ही ध्यान केन्द्रित किया गया है और प्रदूषण के अन्य महत्वपूर्ण स्रोतों को नजरअंदाज किया गया है।

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वायु प्रदूषण - फोटो : Freepik.com

अन्य क्षेत्रों से होता है इतना प्रदूषण

गैर-प्राप्ति शहरों में वायु प्रदूषण के विनियमन के लिए पोर्टल (PRANA) और आईआईटी दिल्ली के स्रोत विभाजन अध्ययन के अनुसार, परिवहन (17 प्रतिशत-28 प्रतिशत) और धूल (17 प्रतिशत-38 प्रतिशत) के अलावा, कई अन्य क्षेत्र पीएम के स्तर में महत्वपूर्ण रूप से योगदान करते हैं। इनमें आवासीय दहन (8 प्रतिशत-10 प्रतिशत), कृषि दहन (4 प्रतिशत-7 प्रतिशत) और औद्योगिक गतिविधियाँ और बिजली संयंत्र (22 प्रतिशत-30 प्रतिशत) शामिल हैं। ये अध्ययन लगातार दर्शाते हैं कि दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता का संकट केवल वाहनों या मौसमी बायोमास जलने के कारण नहीं है, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में से होने वाले निरंतर उत्सर्जन के कारण भी है।

राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण प्रौद्योगिकियों की कमी

सीआरईए के विश्लेषक मनोज कुमार ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, दिल्ली के निकट अधिकांश ताप विद्युत संयंत्रों में फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन (एफजीडी) प्रणाली जैसी महत्वपूर्ण प्रदूषण नियंत्रण प्रौद्योगिकियां अभी भी अनुपस्थित हैं।

11 में से केवल 2 संयंत्रों में ही एफडीजी चालू

2025 के मध्य तक, राजधानी के 300 किलोमीटर के दायरे में स्थित ग्यारह संयंत्रों में से केवल दो एनटीपीसी दादरी और महात्मा गांधी कोयला आधारित बिजली संयंत्र में ही एफजीडी चालू हैं। एफजीडी यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका उपयोग थर्मल पावर प्लांटों और अन्य औद्योगिक प्रक्रियाओं से निकलने वाली फ्लू गैसों से सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) को हटाने के लिए किया जाता है। सीआरईए ने कहा कि यह नियमों की कमी सख्त वाहन नीति से मिले फायदे को कम कर देती है और नियमों के पालन में असंतुलन पैदा करती है। इससे होता यह है कि खेती से जुड़े प्रदूषण पर तो सख्ती होती है, लेकिन दूसरे क्षेत्रों में प्रदूषण अनियंत्रित रूप से जारी रहता है।

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