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चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग के बहाने विपक्ष ने सरकार पर बढ़ाया दबाव

Fri, 20 Apr 2018 11:02 PM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
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कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में सात दलों के करीब 71 सांसदों ने देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा को उनके गलत आचरण (पद का दुरुपयोग) के लिए पद से हटाने के लिए महाभियोग लाए जाने के प्रस्ताव पर अपने दस्तखत किए हैं। कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा में सदन के नेता गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व में इन दलों के नेताओं ने राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू से भेंट की है और उन्हें महाभियोग लाए जाने का प्रस्ताव का नोटिस सौंप दिया है। इसे विपक्षी दलों द्वारा एक बड़े दबाव के रूप में देखा जा रहा है। 
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कांग्रेस पार्टी ने सात विपक्षी दलों के सांसदों के हस्ताक्षर के साथ महाभियोग का यह नोटिस सीबीआई के विशेष जज बीएच जस्टिस लोया की रहस्मय मृत्यु के संदर्भ में उच्चतम न्यायालय का फैसला आने के एक दिन बाद दिया है। इस महाभियोग के प्रस्ताव पर 71 सांसदों ने दस्तखत किए हैं। इनमें से सात सांसदों का कार्यकाल खत्म हो चुका है।

हस्ताक्षर करने वाले 71 सांसदों में पूर्व प्रधानमंत्री और राज्यसभा सदस्य डा. मनमोहन सिंह के हस्ताक्षर नहीं हैं। हालांकि न्यायमूर्ति के खिलाफ महाभियोग लाने के नोटिस के लिए राज्यसभा के न्यूनतम 50 सांसदों या लोकसभा के 100 सांसदों के सहमति की जरूरत होती है। इसे संसद के दोनों सदनों में लाया जा सकता है।
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल के अनुसार संविधान के प्रावधानों के अनुसार हम देश के मुख्य न्यायाधीश को उनके गलत आचरण के लिए महाभियोग का प्रस्ताव ला सकते हैं। यह प्रस्ताव संसद की अनुमति से जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद लाया जा सकता है। इस प्रस्ताव के बारे में गुलाम नबी आजाद ने कहा कि उन्होंने सभापति से पिछले सप्ताह ही मिलने का समय मांगा था, लेकिन उनके पूर्वोत्तर के दौरे के कारण भेंट शुक्रवार को 12 बजे हो सकी। करीब 40 मिनट की मुलाकात हुई और इस दौरान उन्हें देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा के गलत आचरण को देखते हुए उन्हें पद से हटाने के लिए महाभियोग का नोटिस दिया। 

महाभियोग का प्रस्ताव क्यों? 

कपिल सिब्बल ने इसके कारण के तौर पर पहला हवाला उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ जजों की प्रेस वार्ता का दिया। सिब्बल ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के चार जजों ने भी अपने आरोप में मुख्य न्यायाधीश द्वारा न्यायपालिका की स्वायत्तता और स्वतंत्रता का खिलवाड़ बताया था।

सिब्बल के अनुसार उच्चतम न्यायालय के चार जजों के आरोप लगाने के काफी समय बाद कांग्रेस पार्टी संविधान की रक्षा की खातिर अपने लोकतांत्रिक और संवैधानिक कर्तव्य निभाने जा रही है। उसे ऐसा दु:खी मन से करना पड़ रहा है। कांग्रेस और छह विपक्षी दलों ने अपने महाभियोग के प्रस्ताव में देश के मुख्य न्यायाधीश पर पद के दुरुपयोग को लेकर पांच प्रमुख आरोप लगाए हैं।

अब क्या होगा आगे 

दीपक मिश्रा
यह सभापति पर निर्भर करता है कि वह महाभियोग के नोटिस पर विचार करने के बाद उसे स्वीकार करें या फिर अस्वीकार कर दें। सभापति द्वारा प्रस्ताव को स्वीकार करने के बाद तीन सदस्यों की एक कमेटी का गठन किया जाएगा और यह कमेटी मुख्यन्यायाधीश के खिलाफ लाए गए महाभियोग के नोटिस में लगाए गए आरोपों की जांच करेगी। इस कमेटी में उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के जज सदस्य होंगे।

कमेटी द्वारा महाभियोग के प्रस्ताव सही पाए जाने पर इसे लोकसभा और राज्यसभा में पेश किया जाएगा। जहां इस पर बहस होगी और पद से हटाने हेतु महाभियोग के लिए दोनों सदनों में दो तिहाई सदस्यों की मंजूरी आवश्यक होगी। दोनों सदनों में प्रस्ताव के पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। 

महाभियोग पर हलचल 

उच्चतम न्यायालय ने विपक्ष द्वारा महाभियोग का नोटिस दिए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल से इसे रोके जाने की संभावना के बारे में राय मांगी है। जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने इस पर विचार किया और कहा हम सभी इसको लेकर विक्षुब्ध हैं।

महाभियोग को लेकर सार्वजनिक बयानबाजी पर भी दु:ख जताया है। विपक्ष द्वारा महाभियोग का नोटिस दिए जाने के बाद उच्चतम न्यायालय ने इस संदर्भ में बैठक बुलाई थी। इस बैठक में महाभियोग पर सार्वजनिक रूप से चर्चा किए जाने को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया गया। 

सत्ता पक्ष ने भी इसे कांग्रेस और विपक्षी दलों का राजनीतिक हथियार बताया है। वित्तमंत्री अरुण जेटली इस पर प्रतिक्रिया देते हुए महाभियोग के नोटिस को बदले की भावना से उठाया गया कदम बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ऐसा करके न्यायपालिका को डराने का काम कर रही है।

अपने ब्लाग में जेटली ने लिखा कि जब आपके पास कदाचार का कोई स्थापित मामला न हो और संख्याबल भी पक्ष में न हो तब इस शक्ति का प्रयोग डराने के हथकंडे के रुप में प्रयोग करना न्यायिक स्वतंत्रता के समक्ष पैदा हुआ गंभीर खतरा है। भाजपा की सांसद मीनाक्षी लेखी ने भी इसे राजनीतिक बदले की भावना से उठाया गया कदम बताया। 
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विपक्ष को क्या होगा हासिल

विपक्ष
क्या महाभियोग लाया जा सकेगा? 

संभावना नहीं के बराबर है। यदि सभापति इस विपक्ष के नोटिस को मंजूर कर भी लेंगे, तब भी मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा को पद के दुरुपयोग का आरोप लगाकर उनके पद से नहीं हटाया जा सकता है। तीन सदस्यों की कमेटी गठित होने तथा कमेटी की जांच रिपोर्ट में आरोपों के सही पाए जाने पर भी पद से हटाने के महाभियोग के सफलता की संभावना क्षीण है। इसका सबसे बड़ा कारण लोकसभा में कांग्रेस पार्टी समेत विपक्ष के पास दो तिहाई बहुमत का न होना है। संख्याबल के लिहाज से विपक्षी दलों की स्थिति कमजोर है। 

क्या होगा हासिल 

सीबीआई के विशेष जज जस्टिस बीएच लोया की संदिग्ध परिस्थिति में हुई मृत्यु के पीछे भले ही उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने किसी साजिश से इनकार किया हो। इसे स्वाभाविक माना हो, लेकिन विपक्ष अदालत के इस निर्णय का सम्मान नहीं कर रहा है। जस्टिस लोया की मृत्यु के पीछे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के ऊपर विपक्ष संदेह के सवाल खड़े कर रहा है।

इसके पीछे वजह कथित सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ का मामला है। लेकिन महाभियोग लाए जाने की अनुमति मिलने के बाद तमाम तरह के राजनीतिक बयान की संभावना बढ़ जाएगी। इससे जहां देश के मुख्य न्यायाधीश पर दबाव की स्थिति बनी रहेगी, वहीं सत्ताधारी दल के लिए विपक्ष का राजनीतिक दबाव बना रहेगा।
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