तीनों ही जगह उपचुनावों में भाजपा की हार और विपक्षी गठबंधन की जीत का एक संदेश तो स्पष्ट है कि जमीन पर पूरे प्रदेश में गठबंधन का असर है। इन नतीजों का एक बड़ा संदेश सपा और बसपा के लिए भी है कि बिना रालोद के उत्तर प्रदेश में उनका महागठबंधन पूरा नहीं होगा, क्योंकि जाट बहुल पश्चिम उत्तर प्रदेश में रालोद का साथ ही महागठबंधन की जीत की गारंटी बन सकता है।इन नतीजों का एक बड़ा फायदा रालोद अध्यक्ष अजित सिंह और उनके बेटे जयंत चौधरी को ये हुआ है कि प्रदेश की राजनीति में उनका अलगाव अब खत्म हुआ और लोकसभा चुनाव में विपक्षी गठबंधन में उन्हें उचित हिस्सेदारी मिलने का दावा मजबूत हुआ। साथ ही कैराना और नूरपुर से यह संदेश भी मिला है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुसलमानों और जाटों के बीच 2013 के जख्मों से पैदा हुआ अलगाव और दूरी खत्म हुई है और एक बार फिर उनका राजनीतिक गठजोड़ मजबूत हुआ है।
कैराना में जिस तरह भाजपा को चार मंत्रियों के क्षेत्रों से हार मिली वह भी एक सबक है। इनमें दो विधानसभा क्षेत्र गंगोह और नकुड में तो जाटों की तादाद नाममात्र को है, बल्कि गूजरों की संख्या ज्यादा है जबकि भाजपा उम्मीदवार मृगांका सिंह दिवंगत सांसद हुकुम सिंह जो इलाके के मजबूत और सम्मानित गूजर नेता थे, लेकिन वहां भी भाजपा उम्मीदवार का अच्छे खासे मतों से पिछड़ जाना चौंकाता है। उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड की थराली विधानसभा सीट बचाने में भाजपा कामयाब रही है। लेकिन यहां भी उसे कांग्रेस से कांटे का संघर्ष करना पड़ा। लेकिन कर्नाटक में भाजपा अपनी आर आर नगर सीट नहीं बचा सकी और उसे कांग्रेस से करीब 41 हजार मतों से पराजित होना पड़ा। जबकि यहां जनता दल (एस) के उम्मीदवार को खासे वोट मिले।महाराष्ट्र में कांग्रेस पालघर लोकसभा सीट पर चौथे नंबर पर पहुंच गई।
भाजपा अपनी यह सीट बचाने में कामयाब रही। यहां उसका मुकाबला कांग्रेस के अलावा सहयोगी शिवसेना और अघाड़ी पार्टी से भी था। पालघर की जीत से भाजपा को जरूर राहत मिली है लेकिन इसके शिवसेना के साथ उसके रिश्तों में कड़वाहट और बढ़ गई है।महाराष्ट्र की बडेगांव विधानसभा सीट पर कांग्रेस निर्विरोध जीत गई। प.बंगाल में ममता बनर्जी का जलवा बरकरार है और तृणमूल कांग्रेस अपनी दोनों विधानसभा सीटें जीतने में कामयाब रही। पंजाब में कांग्रेस ने भारी मतों से शेरकोट विधानसभा सीट फिर जीती। इसी तरह केरल में हुए के विधानसभा सीट पर माकपा ने जीत दर्ज की।
नगालैंड में हुए उपचुनाव में भाजपा समर्थित एनडीपीपी ने एनपीएफ से लोकसभा सीट छीन ली है। लेकिन सबसे दिलचस्प नतीजा बिहार के जोकीहाट विधानसभा सीट का है जहां लालू प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार शाहनवाज ने 41 हजार से ज्यादा वोटों से जद(यू) उम्मीदवार को हराया। बिहार में नीतीश कुमार के महागठबंधन से अलग होकर भाजपा के साथ जाने के बाद राजद की यह लगातार तीसरी जीत है। इसके पहले हुए अररिया लोकसभा और जहानाबाद विधानसभा सीटों के उपचुनावों में भी राजद ने जीत दर्ज की। लालू प्रसाद यादव की गैर मौजूदगी के बावजूद इन तीनों सीटों पर राजद की जीत ने लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव का सियासी कद खासा मजबूत और बड़ा कर दिया है।