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यूपी-बिहार उपचुनाव: गोरखपुर में 43% और फूलपुर में 37 फीसदी लोगों ने किया मतदान

Sun, 11 Mar 2018 08:50 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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उत्तरप्रदेश और बिहार में तीन लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के लिए मतदान संपन्न हो गया। जानकारी के मुताबिक शाम 5 बजे तक यूपी के फूलपुर में 37.39 फीसदी और गोरखपुर में 43 फीसदी लोगों ने मतदान किया है। 

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मालूम हो कि गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों पर उपचुनाव में किस्मत आजमा रहे 32 उम्मीदवारों का भाग्य आज ईवीएम में कैद हो गया है। यूपी के इन दोनों जिलों में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है।

वहीं बिहार में लोकसभा की एक तथा विधानसभा की दो सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान संपन्‍न हो गया। जानकारी के मुताबिक भभुआ में 54.3% जहानाबाद में 50.6% और लोकसभा की अररिया सीट में 57.0% मतदान हुआ है। 
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बता दें कि मतों की गिनती 14 मार्च को होगी और उसी दिन परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। वोटिंग के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अद्धैसनिक बलों और पीएसी की 65 कंपनियां तैनात की गई हैं। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ने गोरखपुर और डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने फूलपुर सीट से पिछले साल इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद दोनों सीटों पर उपचुनाव संपन्न हुआ है। 

LIVE अपडेट्स: 

उत्तरप्रदेश लोकसभा उपचुनाव: शाम 5 बजे तक फूलपुर में 37.39 फीसदी और गोरखपुर में 43 फीसदी लोगों ने मतदान किया है। 

उत्तरप्रदेश लोकसभा उपचुनाव: शाम 4 बजे तक गोरखपुर में 40 फीसदी और फूलपुर में 29 फीसदी मतदान दर्ज किया गया है। 

वहीं इलाहाबाद पश्चिम में पांच बजे तक 31 फीसदी मतदान हुआ। 

3.04PM: दोपहर तीन बजे तक यूपी की गोरखपुर सीट पर 30.20 फीसदी तो वहीं फूलपुर सीट पर 26.6 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई है। 

दोपहर 12 बजे तक बिहार में अररिया में 31.25 फीसदी मतदान हुआ, वहीं भभुआ में 24.5 फीसदी मतदान हुआ।  
 




अररिया से आरजेडी प्रत्याशी सरफराज आलम ने मतदान किया। बीजेपी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो शीशे के घर में रहते हैं वो दूसरों पर पत्थर नहीं मारते। हमारी जीत पक्की है और हमारा धर्म केवल विकास है। 
 

11 बजे तक विधानसभावार वोटिंग प्रतिशत कैम्पियरगंज में 15 फीसदी, पिपराइच में 18 फीसदी, ग्रामीण क्षेत्र में 17 फीसदी, सहजनवां में 18 फीसदी रहा। कुल वोटिंग प्रतिशत 17 फीसदी रहा। 

अररिया उपचुनाव में सुबह 10 बजे तक 12 फीसदी वोटिंग हुई, वहीं जहानाबाद में बूथ नंबर 94 पर दो गुटों में फायरिंग की खबर सामने आयी है। 

फूलपुर में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने मतदान किया। सुबह 11 बजे तक 12 फीसदी वोटिंग की खबर है। 

यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने कहा कि आज का दिन इतिहास बदलने का भी है और नया इतिहास बनाने का भी। सबको साथ लेकर निकलें और दिखा दें कि हमारी एकजुटता में कितनी ताकत है। इसके नतीजे देश-प्रदेश के भविष्य के लिए क्रांतिकारी और निर्णायक साबित होंगे। 
 

अररिया से बीजेपी प्रत्याशी प्रदीप सिंह ने अपना वोट डाला।
 

 गोरखपुर व फूलपुर लोकसभा सीटों के उपचुनाव में  2 घंटे में 7 फीसदी मतदान हुआ। 

जेहानाबाद में पोलिंग बूथ के बाहर भारी संख्या में मतदाता मौजूद हैं और वोट डालने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। 
 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर के प्राथमिक विद्यालय कुराना झूलेलाल गोरखनाथ मंदिर में सुबह 7 बजे वोटिंग किया। वोटिंग के बाद उन्होंने कहा कि विकास और सुशासन के लिए भाजपा का होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बीजेपी गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव पीएम मोदी के विकास कार्यों के आधार पर बहुमत के साथ जीतेगी। 2019 के नतीजे भी बीजेपी के लिए अच्छे होंगे।



गोरखपुर-फूलपुर में अखिलेश की सोशल इंजीनियरिंग का टेस्ट

वहीं, गोरखपुर व फूलपुर लोकसभा सीटों के उपचुनाव में सपा की सोशल इंजीनियरिंग का इम्तिहान भी होगा। इन सीटों के चुनाव परिणामों से सपा की सियासी दिशा तय होगी। सपा ने न सिर्फ सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखकर प्रत्याशी उतारे हैं, बल्कि उसका पूरा जोर पिछड़ों, दलित व अल्पसंख्यकों की लामबंदी पर भी है। अगर नतीजे सपा के अनुकूल रहे तो 2019 में यही राजनीतिक-सामाजिक समीकरण बनाने की कोशिश होगी। प्रदेश में आबादी के लिहाज से पिछड़ी जातियों की तादाद सर्वाधिक है। इसके बाद दलित व अल्पसंख्यक आते हैं।

पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भाजपा ने पिछड़ी जातियों को पाले में लाने के लिए लंबी कसरत की। अपना दल, भारतीय समाज पार्टी से गठबंधन, केशव मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष बनाना, स्वामी प्रसाद मौर्य समेत कई पिछड़े व दलित नेताओं को भाजपा में शामिल करना ऐसे फैसले रहे, जिनका भाजपा को चुनावों में फायदा मिला। भाजपा ने सोशल इंजीनियरिंग से पिछड़ी व कुछ दलित जातियों को साधा।

किसी जमाने में चौधरी चरण सिंह ने पिछड़ों, दलितों व अल्पसंख्यकों को जोड़ने के लिए सोशल इंजीनियरिंग की शुरुआत की थी। उनके दौरे में पिछड़े नेताओं की बड़ी फौज तैयार हुई। सरकारों में पिछड़ों की नुमाइंदगी बढ़ी। मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक पिछड़े वर्ग के नेता बनने लगे। उनके निधन के बाद मुलायम सिंह यादव ने काफी हद तक इस समीकरण को समझा।

बसपा के संस्थापक कांशीराम का ‘बहुजन’ का फॉर्मूला भी सोशल इंजीनियरिंग पर ही आधारित था। सपा भी इसी सोशल इंजीनियरिंग के रास्ते पर बढ़ी है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश ने भी लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले पिछड़े व दलित नेताओं को जोड़ने की कोशिश की। उन्होंने गोरखपुर में निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद के बेटे प्रवीण को उम्मीदवार बनाया तो फूलपुर में कुर्मी समाज के नागेंद्र सिंह पटेल को चुनाव में उतारा।

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