फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दावा: बंपर फसल से गांवों में बढ़ी आमदनी, एक साल बाद बेहतर आर्थिक हालात की उम्मीद; खरीदारी को लेकर उत्साह भी

Tue, 08 Jul 2025 05:27 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला ब्यूरो

सार

सीएमआईई रिपोर्ट के अनुसार, बंपर फसल से ग्रामीण परिवारों और किसानों की आय में बढ़ोतरी हुई है। जून 2025 में 39.7% परिवारों ने वित्तीय स्थिति में सुधार बताया, जबकि 44.8% को भविष्य में और आय बढ़ने की उम्मीद है। छोटे व्यापारियों और मजदूरों में भी आशावाद देखा गया है।

विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बंपर फसल उत्पादन से ग्रामीण परिवारों और किसानों की आय एक साल पहले की तुलना में बढ़ी है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति बेहतर हुई है। वे एक साल के बाद भी अपनी आय बढ़ने की उम्मीद के साथ उपभोक्ता टिकाऊ उत्पादों की खरीदारी को लेकर भी उत्साहित हैं। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे ग्रामीण परिवारों का अनुपात मई के 36.6 फीसदी से बढ़कर जून, 2025 में 39.7 फीसदी पहुंच गया है, जो मानते हैं कि उनकी आर्थिक स्थिति एक साल पहले से बेहतर हुई है। एक साल बाद आय और बढ़ने की उम्मीद करने वाले ग्रामीण परिवारों का अनुपात बढ़कर रिकॉर्ड 44.8 फीसदी पहुंच गया, जो मई में 38.5 फीसदी था। 
विज्ञापन


इसके विपरीत, ऐसे ग्रामीण परिवारों का अनुपात जून में घटकर 9 फीसदी रह गया, जो मानते हैं कि एक साल में उनकी वित्तीय स्थिति खराब हुई है। एक साल बाद आय बढ़ने को लेकर निराशा जताने वाले परिवारों की हिस्सेदारी मामूली 1.8 फीसदी घटी है। 

बंपर फसल ने बढ़ाई छोटे व्यापारियों की भी उम्मीद  
ग्रामीण भावनाओं पर बंपर फसल उत्पादन का प्रभाव किसान परिवारों से आगे बढ़कर अन्य कारोबारी समूहों तक भी पहुंचने की संभावना है। इसकी एक झलक छोटे व्यापारी और दिहाड़ी मजदूर परिवारों में बढ़ते आशावाद के रूप में देखी जा सकती है। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले करीब तीन-चौथाई छोटे व्यापारी और दिहाड़ी मजदूर परिवारों की वित्तीय स्थिति एक साल पहले की तुलना में बेहतर हुई है। वे एक साल बाद भी आय बढ़ने को लेकर उत्साहित हैं।  
विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- चिंताजनक: 2008 से 2017 के बीच जन्मे 1.5 करोड़ लोगों को पेट में कैंसर की आशंका, चीन में सबसे अधिक मामले

किसान सर्वाधिक आशावादी 
रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल और जून के बीच बंपर फसल उत्पादन के कारण ग्रामीण परिवारों में वर्तमान एवं भविष्य में आय बढ़ने को लेकर आशावाद बढ़ा है। सामान्य से अधिक दक्षिण-पश्चिम मानसून की उम्मीदों ने 2025 में खरीफ फसल अधिक रहने की उम्मीद बढ़ाई है, जिससे ग्रामीण आशावाद को और बढ़ावा मिला है। 

वित्तीय स्थिति और बेहतर होने को लेकर आशावाद किसान परिवारों में सबसे तेजी से बढ़ा है, जो लगभग पूरी तरह ग्रामीण इलाकों में रहते हैं। एक साल पहले के मुकाबले बेहतर वित्तीय स्थिति में रहने वाले किसान परिवारों का अनुपात 35.6 फीसदी से बढ़कर जून में 43.1 फीसदी के स्तर पर पहुंच गया। ऐसे किसान परिवारों की हिस्सेदारी भी 38.5 फीसदी से बढ़कर 52 फीसदी पहुंच गई है, जो मानते हैं कि अगले साल उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। 
विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- Hindi Row: 'भारत में मैं हिंदू हूं, मराठी..., भाषा विवाद के बीच बाल ठाकरे का पुराना वीडियो हो रहा वायरल

ग्रामीण, छोटे व्यापारी और मजदूर परिवार का क्या मानन है
रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के सुदूर इलाकों में आय के मोर्चे पर उत्साह का मतलब है कि लोगों ने खरीदारी के लिए मजबूत इरादे दिखाए। ऐसे ग्रामीण परिवारों का अनुपात 27.6 फीसदी से बढ़कर जून में 35.5 फीसदी पहुंच गया, जो मानते हैं कि उपभोक्ता टिकाऊ उत्पाद खरीदने का यह अच्छा समय है। इस अवधि में नकारात्मक दृष्टिकोण रखने वाले परिवारों का अनुपात घटा है। ग्रामीण भारत में खरीदारी के इरादे में उछाल किसान परिवारों, छोटे व्यापारी और दिहाड़ी मजदूर परिवारों में भी स्पष्ट रूप से देखा गया। अप्रैल-जून के बीच समग्र रूप से इन परिवारों का अनुपात 7 से 11 फीसदी बढ़ा है, जो इसे खरीदारी के लिए अच्छा समय मानते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें