सरहद पर दुश्मन और घर में आतंकियों की गोली को भारतीय सेना के जवानों की छाती पर रोकने वाली बुलेटप्रूफ जैकेट चीन से आयात किए गए सस्ते कच्चे माल से बनाई जा रही है। हालांकि सरकार का कहना है कि इन जैकेटों की क्वालिटी को लेकर चिंता करने लायक कोई बात अभी तक सामने नहीं आई है। नीति आयोग के सदस्य और पूर्व डीआरडीओ चीफ वीके सारस्वत ने रविवार को कहा कि भारतीय कंपनियां चीनी माल का इस्तेमाल महज जैकेट की कीमत को कम रखने के लिए कर रही हैं।
दरअसल सारस्वत से भारतीय सेना की बुलेटप्रूफ जैकेटों में चीनी माल के इस्तेमाल को लेकर चिंता पर सवाल पूछा गया था। उन्होंने जोर देते हुए आगे कहा कि वे सिर्फ तभी हस्तक्षेप कर सकते हैं, जब चीनी माल के इस्तेमाल से बने ये सुरक्षा कवच मानदंडों पर खरे नहीं उतर पाएं। उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक इस तरह की चिंता वाली कोई भी रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
सारस्वत के मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने नीति अयोग को हल्के वजन वाले सुरक्षा कवच (बुलेटप्रूफ जैकेट) के घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए एक रोडमैप तैयार करने को कहा था। उन्होंने बताया कि भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने भी भारतीय सेना द्वारा उपयोग किए जाने वाले सुरक्षा कवच की गुणवत्ता से जुड़े मानदंड तय किए हुए हैं।
बता दें कि इससे पहले भारतीय कंपनियां बुलेटप्रूफ जैकेट का कच्चा माल अमेरिका या यूरोपीय देशों से खरीदती थी। लेकिन इन देशों के मुकाबले चीन से आने वाले कच्चे माल की कीमत कम होने से अब अधिकतर कंपनियां वहीं से माल खरीद रही हैं।
सुरक्षा बलों को चाहिए 3 लाख से ज्यादा जैकेट
सरकारी अनुमान के मुताबिक, भारतीय सुरक्षा बलों को 3 लाख से ज्यादा हल्के वजन वाली बुलेटप्रूफ जैकेटों की जरूरत पड़ेगी। सारस्वत ने कहा, इन आंकड़ाें के आधार पर सुरक्षा बलों ने पहले ही भारतीय निजी कंपनियों को इन बुलेटप्रूफ जैकेटों के निर्माण के आर्डर दे दिए हैं। बता दें कि फिलहाल भारतीय सुरक्षा बल जो जैकेट उपयोग करते हैं, वे बेहद भारी होती हैं। इस कारण लंबे समय से हल्की जैकेटों की मांग हो रही है।
कई देशों को सप्लाई कर रही भारतीय कंपनियां
कानपुर की एमकेयू और टाटा एडवांस्ड मैटीरियल्स समेत अधिकतर भारतीय कंपनियां विभिन्न देशों की सेनाओं को बुलेटप्रूफ जैकेट बनाकर दे रही हैं। सारस्वत के मुताबिक, यदि देश में ही ये कंपनियां हल्की बुलेटप्रूफ जैकेटों व हेलमेटों का बड़े पैमाने पर उत्पादन करेंगी, तो इससे सेना को कम कीमत में इन जैकेटों की सप्लाई मिल जाएगी और उसे विदेशी वेंडरों से जैकेट की सप्लाई के लिए लंबे समय तक इंतजार करने के लिए भी मजबूर नहीं होना पड़ेगा।