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आजम के पेश नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट नाखुश

Tue, 27 Sep 2016 09:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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बुलंदशहर गैंगरेप कांड से संबंधित मामले में यूपी के कैबिनेट मंत्री आजम खां के अदालत में पेश नहीं होने पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने नाखुशी जाहिर की। शीर्ष अदालत ने सीबीआई से कहा है कि वह समाजवादी पार्टी के नेता को दोबारा नोटिस थमाए। यही नहीं कोर्ट ने उनके वकील के जरिए अपनी नाखुशी का संदेश आजम तक भी पहुंचा दिया है। 
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न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश में कहा, ‘हमारी सुविचारित राय में प्रतिवादी नंबर दो (खान) को यहां पेश होना चाहिए था। क्योंकि उनके खिलाफ  प्रत्यक्ष आरोप हैं। इस तथ्य के मद्देनजर हम सीबीआई को निर्देश देते हैं कि प्रतिवादी नंबर दो को फिर से नोटिस थमाई जाए।’ 

न्यायालय ने शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री को भी निर्देश दिया कि नोटिस के अलावा केस रिकॉर्ड की प्रति भी सीबीआई को उपलब्ध कराए, ताकि दोनों को आजम तक पहुंचाया जा सके। इस दौरान सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सालीसीटर जनरल मनिंदर सिंह ने अदालत में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के माध्यम से खान को नोटिस थमाया जा सकता है, क्योंकि वह राज्य मंत्रिमंडल के हिस्सा हैं। 
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आजम खान ने यह सब अपनी ‘निजी हैसियत’ से कहा था

- फोटो : demo Pic
इस पर कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि खान ने यह सब अपनी ‘निजी हैसियत’ से कहा था।  न्यायालय ने पीड़ित के पिता की ओर से पेश वकील किसलय पांडेय को इस मामले में अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने की अनुमति प्रदान करते हुए मामले की अगली सुनवाई 25 अक्टूबर तय की है। 

गौरतलब है कि बुलंदशहर गैंगरेप कांड को इसी साल 29 जुलाई की रात में अंजाम दिया गया था। तब राजमार्ग पर लुटेरों के एक गिरोह ने नोएडा से सपरिवार आ रही कार को बुलंदशहर के पास रोक लिया था। इसके बाद कार सवार मां-बेटी को खींचकर बाहर निकाला और दोनों से दरिंदगी की। 

क्या है मामला?
आजम खान ने कथित विवादित बयान में कहा था कि बुलंदशहर गैंगरेप कांड एक ‘राजनीतिक साजिश’ है। शीर्ष अदालत ने 29 अगस्त को सीबीआई जांच पर रोक लगाते हुए आजम की टिप्पणी को संज्ञान में लिया। कोर्ट ने यह भी पूछा था कि क्या शासन को इस तरह के जघन्य अपराधों के बारे में टिप्पणी करने से उच्च पदों पर आसीन लोगों को रोक ना चाहिए। बाद में आठ सितंबर को कोर्ट ने सीबीआई जांच पर लगी रोक को हटा लिया और आगे की कार्यवाही करने का निर्देश दिया। 
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