रिक्टर स्केल से भूकंप की तीव्रता मापी जाती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल के नाम से भी जाना जाता है। रिक्टर स्केल पैमाने को सन 1935 में कैलिफॉर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाजी के वैज्ञानिक चार्ल्स रिक्टर ने बेनो गुटेनबर्ग के सहयोग से खोजा गया था। भूकंप की तरंगों को रिक्टर स्केल 1 से 9 तक के आधार पर मापता है। आठ की तीव्रता का भूकंप 60 लाख टन से ज्यादा की ऊर्जा पैदा करके तबाही मचा सकता है।
रिक्टर स्केल पर भूकंप का मापन
- 2.0 से कम पैमाने वाले भूकंपों के झटके महसूस नहीं होते।
- 3.0 से 3.9 पैमाने वाले भूकंप महसूस होता है, पर क्षति नहीं पहुंचाता है।
- 4.0 से 4.9 की तीव्रता वाले भूकंप के कंपन से कुछ हद तक नुकसान संभव है।
- 6.0 से 6.9 की तीव्रता वाले भूकंप शक्तिशाली होता हैं, विनाश का कारण बनता है।
- 7.0 से 7.9 पैमाने वाले भूकंप बड़े क्षेत्र में मचाते हैं भयानक तबाही।
- 8.0 से 8.9 वाले भूकंप हजारों मील में मचाते हैं विध्वंस।
भूकंप की तीव्रता जहां सबसे अधिक होती है वह भूकंप का केंद्र माना जाता है। सात से अधिक तीव्रता का भूकंप आने पर 40 किमी की परिधि में झटका सबसे ज्यादा महसूस किया जाता है। केंद्र से दूरी बढ़ने पर भूकंप का प्रभाव कम हो जाता है। भूकंप की गहराई बढ़ने पर झटका भी कम हो जाता है।