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अंतरिम बजट : खाद्य सुरक्षा सब्सिडी में होगी तीन साल की सबसे कम बढ़ोतरी

Wed, 23 Jan 2019 11:57 PM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकताओं में पहले स्थान पर है खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम
  • 2014 में सरकार बनते ही पीएम मोदी ने खाद्य सब्सिडी में 47 फीसदी बढ़ोतरी की थी
  • सरकारी खर्च में रक्षा क्षेत्र के बाद दूसरे स्थान पर है खाद्य सब्सिडी की हिस्सेदारी
  • चालू वित्त वर्ष 2018-19 में 1.69 खरब रुपये की सब्सिडी दी गई थी 
  • सरकार के मुताबिक वित्त वर्ष 2019-20 में सब्सिडी का बजट 1.90 खरब रुपये की संभावना
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विस्तार
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दुनिया के सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के लिए दी जाने वाली सरकारी सब्सिडी में केंद्र सरकार इस बार अंतरिम बजट में 6.5 फीसदी की बढ़ोतरी करने जा रही है। अगले महीने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए पेश किए जाने वाले अंतरिम बजट से सीधे तौर पर जुड़े दो सूत्रों ने इस निर्णय की जानकारी दी है। दोनों सूत्रों का यह भी कहना है कि हर साल 1 अप्रैल से शुरू होने वाले अगले वित्त वर्ष में मिलने वाली इस सब्सिडी में यह पिछले तीन साल की सबसे कम बढ़ोतरी है। इसका असर किसानों से फसल की सरकारी खरीद और गरीबों के लिए सस्ते दामों पर दिए जाने वाले राशन पर पड़ सकता है।

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बजट की गोपनीयता के चलते अपना नाम छिपाने वाले सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने अगले वित्त वर्ष के लिए बजट में खाद्य सब्सिडी के लिए 1.8 खरब रुपये का ही प्रावधान करने का निर्णय लिया है, क्योंकि वह मई में प्रस्तावित आम चुनावों (लोकसभा चुनावों) से पहले अपने बजटीय घाटे को कम करने की जुगत लगा रही है। बता दें कि सरकार के बजट लक्ष्य अगले दो वर्ष के लिए पहले ही दबाव में हैं, क्योंकि किसानों की फसल की कम कीमतों की भरपाई करने के लिए उसे विभिन्न तरह के भुगतान करने हैं।

ऐसे में सूत्रों का मानना है कि महज 6.5 फीसदी की बढ़ोतरी विशालकाय खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम की लागत को पूरा कर पाने में सक्षम साबित नहीं होगी। खासतौर पर सरकार के उस कीमत में बढ़ोतरी करने के बाद, जिस पर वह घरेलू किसानों से धान की सरकारी खरीद करती है।

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कैसे काम करती है खाद्य सुरक्षा सब्सिडी

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत सरकारी कंपनी भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) किसानों से एक निश्चित दाम पर चावल और अनाज खरीदती है। इसके बाद सरकारी एजेंसियां राशन व्यवस्था के तहत ये खाद्य पदार्थ देश की 1.3 अरब जनसंख्या के 67 फीसदी लोगों को बाजार मूल्य से तकरीबन 1/10वें दामों पर उपलब्ध कराती हैं। बजट में दी जाने वाली सब्सिडी का बड़ा हिस्सा किसानों को उनकी फसल का ऊंचा दाम देने और इसके बाद बेहद कम दाम पर जनता को खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने में खर्च हो जाता है।

एफसीआई पर पहले से ही दबाव

सरकार की तरफ से बड़े पैमाने पर खाद्य सब्सिडी बजट दिए जाने के बावजूद एफसीआई के लिए यह कम साबित हो रही है। सरकारी अनाज खरीद करने वाली मुख्य एजेंसी को सरकार के कल्याण कार्यक्रम चलाए रखने के लिए अरबों डॉलर का उधार लेना पड़ रहा है। पिछले महीने देश के शीर्ष ऑडिटर नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (कैग) ने बताया था कि एफसीआई का सरकार पर बकाया 6 साल में करीब चार गुना बढ़ा है। 

वित्त वर्ष 2011-12 में एफसीआई को सरकार से 234 अरब रुपये लेने थे, जो मार्च, 2017 में बढ़कर 813 अरब रुपये हो गए थे। सरकारी बजट में मिलने वाली सब्सिडी कितनी अपर्याप्त है, इसका अंदाजा चालू वित्त वर्ष में मार्च, 2019 तक के लिए मिले 1.69 अरब रुपये में से सरकार नवंबर तक ही 1.46 अरब रुपये खर्च कर चुकी थी।
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