अंतरिम बजट में घोषित लोक लुभावन योजनाओं के बाद भारतीय रिजर्व बैंक अपनी आगामी नीतियों की समीक्षा के दौरान राजकोषीय घाटा दरों में कटौती कर सकता है। वित्तीय विश्लेषकों की मानें तो राजकोषीय फिसलन के कारण मुद्रास्फीति के संभावित जोखिम न बढ़े, इसलिए ऐसा कदम उठाया जा सकता है।
फिलहाल, आरबीआई को चुनाव के बाद मुख्य बजट पेश होने का इंतजार है, जोकि जून या जुलाई में पेश किए जाने की संभावना है। इसके बाद राजकोषीय दरों पर विचार किया जा सकता है। विश्लेषकों के अनुसार, सरकार द्वारा पेश अंतरिम बजट खजाना खाली करने की तरह है। इससे बाजार में असंतुलन की संभावना है।
विश्लेषकों का मानना है कि किसानों, मध्यम वर्ग और असंगठित क्षेत्र को लुभाने के लिए पेश हुए बजट से मुद्रास्फीति की संभावना है। मुद्रास्फीति ऐसी स्थिति है, जब बाजार में लोगों के पास ज्यादा पैसा उपलब्ध हो जाता है और खरीदारी करने की क्षमता बढ़ जाती है।
सरकार ने वित्तीय वर्ष 2019 के लिए राजकोषीय घाटे में 3.4 प्रतिशत का बजट रखकर मामूली लेकिन महत्वपूर्ण वृद्धि कर दी है, जोकि पहले 3.3 प्रतिशत था। इसे केंद्र सरकार के इस कार्यकाल में दूसरी बार अपने लक्ष्य के खिलाफ उल्लंघन माना गया है। आरबीआई को चुनाव बाद पेश होने वाले मुख्य बजट का इंतजार है।