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Budget 2026: दुनिया की टॉप सीक्रेट एजेंसियों में शामिल होगा इंटेलिजेंस ब्यूरो, ₹2889 करोड़ बढ़ा आईबी का बजट

Sun, 01 Feb 2026 04:53 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले साल कहा था कि 'इंटेलिजेंस ब्यूरो' यानी 'आईबी' की कार्यपद्धति, सतर्कता, सक्रियता, निर्णायक भूमिका निभाना और यश लेने के समय किसी और को आगे करने की त्याग व समर्पण की एक परंपरा ने अभी तक देश को सुरक्षित रखा हुआ है।
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केंद्रीय बजट 2026-27 - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले साल कहा था कि 'इंटेलिजेंस ब्यूरो' यानी 'आईबी' की कार्यपद्धति, सतर्कता, सक्रियता, निर्णायक भूमिका निभाना और यश लेने के समय किसी और को आगे करने की त्याग व समर्पण की एक परंपरा ने अभी तक देश को सुरक्षित रखा हुआ है। 10 साल में आसूचना ब्यूरो की तत्परता, तीक्षणा और परिणाम लाने की क्षमता में काफी सुधार हुआ है। आधुनिक चुनौतियों के सामने कठिन परिस्थितियों में विगत छह साल में आसूचना ब्यूरो ने देश को सुरक्षित रखा है। दुनिया की टॉप 'सीक्रेट' एजेंसियों में 'इंटेलिजेंस ब्यूरो' हो शामिल करने की तैयारी शुरु हो गई है। केंद्रीय बजट में आईबी के लिए आवंटित धनराशि में 2889 करोड़ रुपये का इजाफा किया गया है। 
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बता दें कि 2023-24 के दौरान आईबी के लिए 3,268.94 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए थे। 2024-25 में गुप्तचर ब्यूरो का बजट 3,823.83 करोड़ रुपये किया गया। पिछले साल आईबी का बजट 3893.35 करोड़ रुपये रहा था। साल 2026-27 के बजट में 'इंटेलिजेंस ब्यूरो' के लिए भारी राशि का प्रावधान किया गया है। इस बार खुफिया एजेंसी का बजट 6782.43 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। जाँच एवं सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस बजट में हुई बढ़ोतरी को कई बातों से जोड़ा है। बजट में अलॉट हुई राशि से 'सर्विलांस' के लिए नए उपकरण खरीदे जाएंगे। आईबी का प्रयास है कि घटना होने से पहले ही उसे टाल दिया जाए। इसके लिए आईबी के मौजूदा तकनीकी स्टाफ की संख्या में इजाफा किया जा रहा है। गृह मंत्री अमित शाह कह चुके हैं कि आसूचना ब्यूरो ने अपनी निष्ठा, साहस, त्याग और समर्पण की परंपरा को न केवल बरकरार रखा है, बल्कि इसे आगे भी बढ़ाया है। 

हाईब्रिड आतंकवाद का सामने करने के लिए आईबी के मल्टी एजेंसी सेंटर 'मैक' को जिला स्तर तक ले जाने की बात हो रही है। सभी एजेंसियों के बीच सूचनाओं का त्वरित आदान प्रदान हो, इसमें एआई का इस्तेमाल और नई तकनीक अपनाने को लेकर एक प्रपोजल तैयार किया गया है। मैक के जरिए आतंकवाद, संगठित अपराध और साइबर हमलों जैसे गंभीर खतरों से निपटने के लिए डेटा एनालिटिक्स की गुणवत्ता में सुधार और ट्रेंड एनालिसिस को सटीक बनाने पर जोर रहेगा। हॉट स्पॉट की मैपिंग, टाइम लाइन एनालिसिस, प्रेडिक्टिव और ऑपरेशन आउटकम का दायरा बढ़ाया जा रहा है। इंटेलिजेंस फ्यूजन सेंटर (आईएफसी) में 500 करोड़ रुपए की लागत से मैक नेटवर्क में गुणात्मक और संख्यात्मक, दोनों तरह के बदलाव किए गए हैं। द्वीपीय हिस्से, उग्रवाद प्रभावित और ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में  स्टैंडअलोन सुरक्षित नेटवर्क बढ़ाया जा रहा है। 
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गृह मंत्रालय के अंतर्गत खुफिया सूचना जुटाने वाले इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के 'बाज', यानी मल्टी एजेंसी सेंटर (एमएसी) पर गृह मंत्री अमित शाह का खास फोकस है। ये खुफिया 'मल्टी एजेंसी सेंटर' 24 घंटे बाज की तरह सतर्क रहता है। सेना-सीएपीएफ, एनआईए, ईडी और सीबीआई सहित लगभग 26 केंद्रीय एजेंसियां 'मल्टी एजेंसी सेंटर' में अपने सीक्रेट इनपुट साझा करती हैं। पिछले कुछ वर्षों से 'मैक' की कार्यप्रणाली को तेज एवं प्रभावी बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके चलते अब 'मल्टी एजेंसी सेंटर' का दायरा बढ़ाया जा रहा है। मैक के अंतर्गत साइबर सुरक्षा, नार्को टेरर और उभरते कट्टरपंथी हॉटस्पॉट पर नजर रखने के लिए एसओपी बनाए गए हैं। इस केंद्र की मदद से कई अपराधों को होने से पहले ही रोकने में सफलता मिली है। 
केंद्रीय गृह मंत्री ने राज्यों के पुलिस संगठन एवं खुफिया सूचनाएं एकत्रित करने वाली इकाइयों से भी आग्रह किया था कि वे 'मैक' के साथ अधिक से अधिक सूचनाएं साझा करें। 
इसके बाद 'मैक' में खुफिया सूचनाओं के आदान प्रदान की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। अगर किसी भी केंद्रीय या राज्य की एजेंसी के पास कोई छोटा मोटा इनपुट है तो वह भी 'मैक' में साझा किया जाता है। 

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा था, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जीतने के लिए संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण के साथ एक एकीकृत एक्शनेबल सिस्टम बनाना होगा। आतंकवाद के वित्तपोषण, क्रिप्टो जैसी नई चुनौतियों से निपटने के लिए राज्यों के पुलिस थानों से लेकर पुलिस महानिदेशक के कार्यालय तक समन्वित अप्रोच अपनानी होगी। 'नीड टू नो' से 'ड्यूटी टू शेयर', मैक में अब इन सभी बातों पर काम शुरु हो गया है। देश में उभरते सुरक्षा खतरे के परिदृश्य के बीच आतंकी नेटवर्क और उनके सहायक पारिस्थितिकी तंत्र को खत्म करने के लिए सभी एजेंसियों के बीच बेहतरीन तालमेल देखने को मिल रहा है। मैक के ढांचे को अपनी पहुंच और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए बड़े तकनीकी/परिचालन सुधारों से गुजारा जा रहा है। 

पहले मैक में कई केंद्रीय और राज्यों की एजेंसियां, खुले तौर से सूचनाओं का आदान प्रदान नहीं कर पाती थी। वजह, उन्हें लगता था कि मैक में अगर सूचना पुख्ता नहीं निकली या डेस्क पर उसे गिरा दिया गया तो बदनामी होगी। कई बार ऐसा हुआ भी था कि किसी केंद्रीय बल या एजेंसी से कोई सूचना मिली, लेकिन उस बाबत संबंधित अधिकारी पर इतने सवालों की बौछार कर दी गई कि सूचना देने वाले ही मौन रह गए। इससे मैक में सूचना भेजने वालों को यह लगने लगा कि सूचना पुख्ता नहीं हुई तो उन्हें शर्मिंदा होना पड़ सकता है। नतीजा, कई बार छोटी सूचनाएं, मैक के डेस्क से गायब होने लगी। कई ऐसे मौके भी आए, जिसमें सूचना के स्त्रोत को लेकर काफी सवाल जवाब हुए। अब मैक की प्रक्रिया को काफी सरल बनाया गया है। भले ही सूचना पुख्ता न हो, लेकिन वह अस्तित्व में है तो भी उस पर मैक में चर्चा की जाती है। 

मैक में केंद्र की 26 से ज्यादा सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों की खुफिया विंग शामिल होती हैं। इन एजेंसियों की मदद से पर्दे के पीछे बैठकर आतंकी गतिविधियों एवं दूसरे अपराधों को विभिन्न तरीके से प्रोत्साहन देने वालों को पकड़ा जाता है। कश्मीर, माओवादी इलाके और उत्तर पूर्व के राज्यों में सक्रिय उग्रवादी समूहों को पूरी तरह खत्म करने के लिए जो समयबद्ध मुहिम शुरु की गई है, उसमें मैक की अहम भूमिका है। आर्मी, नेवी, एनआईए, सीबीआई, आईबी, रॉ, सीएपीएफ, डीआरआई व ईडी सहित 26 केंद्रीय एजेंसियां, केंद्रीय गृह मंत्रालय के मल्टी एजेंसी सेंटर (मैक) के जरिए अपनी खास रणनीति को अंजाम देती हैं। बॉर्डर क्राइम और आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए 'व्हाइट कॉलर यानी सफेदपोश अपराधी, जो पर्दे के पीछे बैठकर उन्हें वित्तीय, हथियार एवं अन्य तरीके से मदद पहुंचाने का काम करते हैं, उन्हें बाहर निकालने में भी मैक की खास भूमिका है। 

जांच भले ही कोई एजेंसी करें, लेकिन वह सूचना अविलंब मैक तक पहुंचाई जाती है। आतंकियों के मददगारों का पता चलते ही एनआईए, ईडी और आईटी जैसी एजेंसियां उनके ठिकानों पर छापा मार सकती हैं। उनके पास आर्थिक स्रोत क्या है, उसका पता लग जाता है। इसमें यह भी देखा जाता है कि हवाला के जरिए तो पैसा नहीं आया है। शैल कंपनियां भी संगठित अपराध में बड़ी मददगार साबित होती हैं। इनकी जड़ों पर वार करना जरुरी है। इसके लिए मैक के माध्यम से राज्य एवं केंद्रीय जांच एजेंसियों के बीच तालमेल बेहतर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। शाह की अप्रोच पर अब मल्टी एजेंसी सेंटर में भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इसे एक ऐसा एकीकृत मंच बनाने पर जोर दिया गया है, जो निर्णायक और त्वरित कार्रवाई के लिए सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों, नशीली दवाओं के खिलाफ एजेंसियों, साइबर सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को एक साथ लाए।
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