वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के पहले यह सरकार का आखिरी पूर्ण बजट था, इसलिए पहले से अनुमान लगाया जा रहा था कि सरकार लोकलुभावन योजनाओं को आगे बढ़ाएगी। यही हुआ और सरकार ने लोकसभा चुनाव और इस साल होने वाले नौ राज्यों के विधानसभा चुनाव के पहले खजाना खोल दिया। बजट में वेतनभोगी वर्ग, युवाओं, महिलाओं, एमएसएमई सेक्टर के छोटे कारोबारियों को साधने के साथ-साथ उस राशन और प्रधानमंत्री आवास योजना को और ज्यादा मजबूती दी गई है, जिसे सरकार की 2019 में वापसी के लिए बहुत हद तक श्रेय दिया गया था। सरकार ने बजट के जरिए सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश भी की है, जिसके सहारे विपक्ष उन्हें घेरने की रणनीति बना रहा है। तो क्या मोदी सरकार की 2024 में वापसी की राह आसान हो गई?
सामाजिक समीकरण भी साधे
2024 के लोकसभा चुनावों में विपक्ष सामाजिक समीकरणों के सहारे भाजपा को चुनौती देने की रणनीति बना रहा है। बिहार की राष्ट्रीय जनता दल, उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी और दक्षिण भारत के राजनीतिक दल इन्हीं समीकरणों के सहारे अपने मतदाताओं पर अपनी पकड़ मजबूत बनाना चाहते हैं। इसी बीच केंद्र सरकार ने बजट 2023 के जरिए समाज के दलितों, वंचितों, पिछड़ों और जनजातीय समुदायों के लिए विभिन्न योजनाएं जारी कर उन्हें मजबूती देने का एलान किया है।
पिछले चुनावों का अनुभव बताता है कि जब जनता को अपना सीधा आर्थिक लाभ सामने दिखाई पड़ता है, तब मतदान करने के समय वह अपनी पारंपरिक सोच से बाहर निकल जाता है। समाजवादी दलों के दलित-पिछड़ी जातियों और मुसलमान मतदाताओं के वोट बैंक में भाजपा ने इसी आधार पर सेंध लगाने में सफलता पाई थी। चूंकि सरकार ने इन वर्गों को विभिन्न योजनाओं के जरिए ज्यादा मजबूती देने का काम किया है, माना जा सकता है कि उसे अगले चुनावों में भी इसका लाभ मिल सकता है।
नौकरियों के अवसर बढ़े तो मिलेगा लाभ
आर्थिक मामलों के जानकार डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि केंद्र सरकार ने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश को अपना मूल मंत्र बना रखा है। अपने कार्यकाल के पहले लगभग आठ सालों में सरकार ने इसी मंत्र को अपनाया था और इस बार भी 10 लाख करोड़ से ज्यादा धनराशि सीधा मूलभूत ढांचे के विकास के लिए झोंकी गई है। कई अप्रत्यक्ष योजनाओं के जरिए यह राशि और अधिक हो जाएगी। इसका सीधा लाभ नौकरियों में सृजन और लगभग 50 दूसरे उद्योगों को गति देने के काम आएगा।
चूंकि, देश में सेवा क्षेत्र में लगातार विस्तार हो रहा है। देशी-विदेशी कंपनियां भारत में नए-नए उद्यम लगा रही हैं और खुदरा क्षेत्र में सीधे उतरते हुए रिटेल आउटलेट खोल रही हैं। आज लगभग हर घर में एक-दो लोग नौकरीपेशा हो गए हैं। सरकार ने इस वर्ग के लिए सीधे सात लाख रुपये तक की आय पर छूट देकर इस वर्ग को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की है।
गरीब वर्ग को भी सरकार ने साधा
डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि भारत का लगभग 96 फीसदी कार्य बल असंगठित क्षेत्र में काम करता है। यह कार्य बल छोटी-छोटी दुकानों, रेहड़ी-पटरी पर काम करने वाले कामगरों, छोटी फैक्ट्रियों के सहारे अपनी रोजी-रोटी चलाता है। केंद्र सरकार ने इस एमएसएमई सेक्टर को मजबूती देने के लिए विशेष योजना का एलान किया है। ये वर्ग सरकार का समर्थक माना जाता है। इन योजनाओं के आने से यह वर्ग एक बार फिर मोदी सरकार के पक्ष में खड़ा हो सकता है और सरकार की राह आसान हो सकती है।
महिलाओं-सामाजिक समीकरणों का मिलेगा लाभ
राजनीतिक विश्लेषक सुनील पांडेय ने अमर उजाला से कहा कि विभिन्न चुनाव परिणामों के विश्लेषण से एक बात स्पष्ट हुई है कि विभिन्न वर्गों ने अपनी पारंपरिक सोच पीछे छोड़कर भाजपा के पक्ष में मतदान किया है। मुस्लिम मतदाता भी भाजपा के पक्ष में मुड़ रहे हैं। यह केवल सरकार की उन योजनाओं का असर कहा जा सकता है, जिसे उसने धर्म-जाति से अलग हटकर सबके लिए लागू किया है। इसमें सबसे बड़ा श्रेय प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री किसान सहायता योजना और राशन योजना को दिया जा सकता है। 2019 में मोदी की वापसी के लिए यही योजनाएं आधार बनी थीं। चूंकि सरकार ने इन योजनाओं को और ज्यादा मजबूत बनाने का काम किया है, माना जा सकता है कि अगले चुनावों में उसे इसका लाभ मिल सकता है और उसकी राह आसान हो सकती है।