देश में अंदरूनी मोर्चे पर बढ़ते आंदोलनों और नक्सलवाद व माओवादी जैसी गतिविधियों के खिलाफ तेज होती जंग का असर बजट पर स्पष्ट दिखाई दिया है। केंद्र सरकार ने आंतरिक सुरक्षा के बजट में बढ़ोतरी करते हुए नए थाने-चौकियों के निर्माण की राह प्रशस्त की है तो आधुनिकीकरण की तरफ भी इशारा किया है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय को 1,66,546.94 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जिसमें से केंद्रीय रिजर्व बलों यानी सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ आदि के लिए 1,03,802.52 करोड़ रुपये का प्रावधान है। यह पैसा इन रिजर्व बलों के वेतन के अलावा उनके आधुनिकीकरण पर भी खर्च किया जाएगा।
इसके अलावा देश के दोनों सबसे नए केंद्र शासित प्रदेशों में जम्मू-कश्मीर के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 30,757 करोड़ रुपये और लद्दाख के लिए 5,958 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। हालांकि लद्दाख के दुरूह भूगोल को देखते हुए और चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के कारण वहां आंतरिक सुरक्षा के मद में अलग से आवंटन को स्पष्ट नहीं किया गया है। चंडीगढ़ के लिए 4661.12 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। गृह मंत्रालय को जनगणना कार्य के लिए भी 3768.28 करोड़ रुपये का बजट मिला है, जो इसी साल शुरू होना है।
सीबीआई के खाते में 36 लाख की कटौती
सीबीआई को पिछले साल के मुकाबले 36 लाख रुपये की कटौती का सामना करना पड़ा है, जबकि अकेले पिछले साल 67 हजार से ज्यादा भ्रष्टाचार व बैंक धोखाधड़ी के मामले दर्ज करने के कारण बोझ कई गुना बढ़ गया है।
सीबीआई के लिए 835.39 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जबकि पिछले साल उसे पहले 802.19 करोड़ और फिर संशोधन के बाद 835.75 करोड़ रुपये मिले थे। ऐसे में नए मामले संभालने के लिए उसकी मानव संसाधन बढ़ाने की मांग फिलहाल अधर में लग रही है। वित्त वर्ष 2019-20 में सीबीआई के लिए 786.08 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ था।